भारत की अनुभवी महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने लंबे समय बाद वर्ष की शुरुआत में प्रतिस्पर्धी टेनिस में वापसी की थी. सानिया ने मां बनने के 2 साल बाद खिताबी जीत के साथ कोर्ट में वापसी की. हालांकि इसके बाद उन्हें चोट की वजह से कई टूर्नामेंट से खुद को बाहर रखना पड़ा. सानिया को गर्व है कि क्रिकेट से इतर भारत के खेल सितारों में महिलाएं शामिल हैं हालांकि उन्हें लगता है कि देश में महिलाओं के लिए खेलों को वास्तविक करियर के रूप में देखने में अभी कुछ और समय लगेगा. Also Read - इस बार की ईद कई अनगिनत कारणों से पहले जैसी नहीं रही: सानिया मिर्जा

6 बार की ग्रैंडस्लैम विजेता ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित वेबिनार के दौरान कई मसलों पर बातचीत की जिसमें माता-पिता की भूमिका और महिला खिलाड़ियों के प्रति कोचों का रवैया शामिल है. Also Read - कोरोना वायरस पॉजिटिव रसोइये की मौत के बावजूद साई केंद्र में ही रहेंगे हॉकी खिलाड़ी

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सानिया ने कहा, ‘मैं इस बात से गर्व महसूस करती हूं कि क्रिकेट से इतर देश में सबसे बड़े खेल सितारे महिलाएं हैं. अगर आप पत्रिकाएं, बिलबोर्ड देखोगे तो आपको महिला खिलाड़ी दिखेंगी. यह बहुत बड़ा कदम है. मैं जानती हूं कि महिला होकर खेलों में आना मुश्किल होता है.’

Hobart International 2020: सानिया मिर्जा ने खिताब के साथ की टेनिस कोर्ट पर वापसी

उन्होंने कहा, ‘यह इस बात का संकेत है कि चीजें बदली हैं लेकिन अभी हमें उस स्थिति में पहुंचने के लिए लंबी राह तय करनी है जबकि एक लड़की मुक्केबाजी के ग्लब्स पहने या बैडमिंटन रैकेट पकड़े या कहे कि ‘मैं पहलवान बनना चाहती हूं.’ मेरे कहने का मतलब है कि प्रगति नैसर्गिक होनी चाहिए.’

माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी चिकित्सक, वकील, शिक्षिका बने लेकिन खिलाड़ी नहीं’

सानिया से पूछा गया कि लड़कियां 15 या 16 साल के बाद टेनिस क्यों छोड़ देती हैं तो उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति से जुड़ा गंभीर मसला है.

उन्होंने कहा, ‘दुनिया के इस हिस्से में माता पिता खेल को सीधे तौर पर नहीं अपनाते. वे चाहते हैं कि उनकी बेटी चिकित्सक, वकील, शिक्षिका बने लेकिन खिलाड़ी नहीं. पिछले 20-25 वर्षों में चीजें बदली हैं लेकिन अब भी लंबा रास्ता तय करना है.’

इन भारतीय महिलाओं ने इंटरनेशनल स्तर पर छोड़ी है छाप

भारत की कई महिला खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष छाप छोड़ी हैं इनमें ओलंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधू और साइना नेहवाल, छह बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज एमसी मेरीकॉम, एशियाई खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट, पूर्व विश्व चैंपियन भारोत्तोलक मीराबाई चानू आदि प्रमुख हैं.

सानिया ने हालांकि महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली कई चुनौतियों पर बात की.

चोट से उबरी सानिया मिर्जा, दुबई ओपन में करेंगी वापसी

उन्होंने कहा, ‘लड़कियों के लिए कुछ चीजें तय कर दी जाती. यहां तक कि मैंने सब कुछ हासिल कर दिया तब भी मुझसे पूछा जाता था कि मैं कब बच्चे के बारे में सोच रही हूं और जब तक मैं मां नहीं बनूंगी मेरी जिंदगी पूर्ण नहीं होगी. हम लोगों से गहरे सांस्कृतिक मुद्दे जुड़े हैं और इनसे निजात पाने में अभी कुछ पीढ़ियां और लगेंगी.’

लड़कियों को कोचिंग देना मुश्किल’

सानिया ने इसके साथ ही कहा कि लड़कियों को प्रशिक्षण देते हुए कोचों को अधिक समझदारी दिखानी चाहिए. बकौल सानिया, ‘लड़कियों को कोचिंग देना अधिक मुश्किल है. जब 13-14 साल की होती है तो तब उन्हें पता नहीं होता है कि वे क्या हैं. उनके शरीर में बदलाव हो रहा होता है. उनके शरीर में हार्मोन संबंधी बदलाव होते हैं जो कि उनकी पूरी जिंदगी होते रहते हैं.’

गौरतलब है कि सानिया ने साल 2020 की शुरुआत खिताबी जीत के साथ की. उन्होंने जनवरी में यूक्रेन की नादिया किचेनोक के साथ जोड़ी बनाकर होबार्ट इंटरनेशनल टेनिस टूर्नामेंट का महिला युगल खिताब जीता था.