David-Warner-of-Australia-hits-a-boundary2भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज के आखिरी मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। डेविड वार्नर (101) और क्रिस रोजर्स (95) के बीच पहले विकेट के लिए हुई 200 रनों की शानदार साझेदारी के दम पर आस्ट्रेलिया ने सिडनी क्रिकेट मैदान (एससीजी) पर मंगलवार को चायकाल तक दो विकेट पर 242 रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। कप्तान स्टीवन स्मिथ 28 और शेन वॉटसन 10 रनों पर नाबाद लौटे। दोनों अब तक तीसरे विकेट के लिए 38 रन जोड़ चुके हैं। स्मिथ ने 49 गेंदों का सामना कर चार चौके लगाए हैं जबकि वॉटसन ने अब तक 37 गेंदों का सामना किया है। मेजबान टीम अब तक 60 ओवरों का सामना कर 4.03 के औसत से रन बटोरने में सफल रही है।

चार मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी मेजबान टीम ने अपने सलामी बल्लेबाजों के उम्दा खेल के कारण पहला सत्र पूरी तरह अपने नाम किया। दूसरे सत्र में भी मेजबान सलामी बल्लेबाज हावी रहे। इस सत्र में हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने वार्नर और फिर रोजर्स के रूप में दो सफलता हासिल की लेकिन तब तक आस्ट्रेलियाई टीम काफी अच्छी स्थिति हासिल कर चुकी थी।

ताबड़तोड़ अंदाज में खेल रहे वार्नर ने पहले तो 45 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया और फिर 108 गेंदों पर इस सीरीज में अपना तीसरा और कुल 12वां सैकड़ा ठोका। वार्नर दिशाहीन दिख रहे भारतीय गेंदबाजों को ऐसे खेल रहे थे, मानो वे एकदिवसीय मैच खेल रहे हों।

दूसरी ओर, उनके साथी रोजर्स भी काफी सुदृढ़ और संयमित अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे थे। रोजर्स ने 91 गेंदों पर इस सीरीज का अपना लगातार पांचवां अर्धशतक पूरा किया। वह ऐसा करने वाले चौथे आस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज हैं। रोजर्स हालांकि अपने शतक से पांच रनों से चूक गए और 204 रनों के कुल योग पर मोहम्मद समी की गेंद पर बोल्ड हुए। रोजर्स ने 160 गेंदों पर 13 चौके लगाए।

रोजर्स से पहले वार्नर का विकेट गिरा। वार्नर को रविचंद्रन अश्विन ने मुरली विजय के हाथों कैच कराया। वार्नर ने 114 गेंदों का सामना कर 16 झन्नाटेदार चौके लगाए। यह इसी सीरीज में उनका तीसरा शतक है। वह एडिलेड टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगा चुके हैं।

वार्नर के अलावा कप्तान स्टीवन स्मिथ और भारतीय कप्तान विराट कोहली भी इस सीरीज में तीन-तीन शतक लगा चुके हैं।

वार्नर ने 63 के निजी योग पर अपने मरहूम साथी फिलिप ह्यूज को याद दिया। एससीजी पर ही 25 नवम्बर को टेस्ट बल्लेबाज ह्यूज को शेफील्ड शील्ड मुकाबले के दौरान सीन एबॉट की बाउंसर गेंद पर चोट लगी थी।

ह्यूज को अस्पताल ले जाया गया था, जहां खतरे से उबारने के लिए उनका ऑपरेशन किया गया लेकिन दो दिनों बाद उनकी मौत हो गई। वार्नर और ह्यूज काफी अच्छे दोस्त थे। वार्नर ने एससीजी पर 63 के कुल योग पर पहुंचने के साथ ही दोनों हाथ उठाकर अपने साथी को याद किया और फिर झुककर उस स्थान को चूमा, जहां ह्यूज गश्त खाकर गिरे थे।

वार्नर इस दौरान अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। वार्नर की आंखों में आंसू थे। दर्शकों ने वार्नर के इस अवतार को स्वागत किया और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ वार्नर के माध्यम से ह्यूज को श्रृद्धांजलि दी। वार्नर बल्लेबाजी से पहले अपने आंसू पोछते नजर आए। यह वाकई काफी भावनात्मक पल था।

भारतीय टीम चार बदलावों के साथ इस मैच में खेल रही है। चेतेश्वर पुजारा, इशांत शर्मा और शिखर धवन को बाहर कर दिया गया जबकि महेंद्र सिंह धौनी ने संन्यास ले लिया है। धौनी की जगह रिद्धिमान साहा ने लिया जबकि धवन और पुजारा के स्थान पर सुरेश रैना और रोहित शर्मा को मौका मिला। भुवनेश्वर कुमार पहली बार इस सीरीज में खेल रहे हैं। उन्होंने इशांत की जगह ली।

विराट की कप्तानी से नये युग का आगाज।
सीरीज गंवा देने के बावजूद भारत जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यहां चौथे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट के लिए उतरा तो आक्रामक विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया के लिए नए युग की शुरुआत हुई। मेलबर्न में ड्रॉ हुए तीसरे टेस्ट के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना भी भारत के लिए बड़ा झटका है। इसके बाद कोहली को कप्तान की जिम्मेदारी दी गई और अब यह देखना रोचक होगा कि सीरीज में अब तक तीन शतक जड़ चुका यह आक्रामक बल्लेबाज टीम की अगुआई करने के दबाव से निपटकर टीम की प्रतिष्ठा को बचा पाता है या नहीं।

आस्ट्रेलिया ने इस मैच के लिए एक परिवर्तन किया। तेज गेंदबाज मिशेल जानसन के स्थान पर मिशेल स्टार्क को अंतिम एकादश में शामिल किया गया। स्टार्क ब्रिस्बेन टेस्ट में खेले थे।

आस्ट्रेलिया ने एडिलेड और ब्रिस्बेन में जीत हासिल करते हुए 2-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। मेलबर्न में खेला गया तीसरा टेस्ट मैच बराबरी पर छूटा था। मेलबर्न टेस्ट के बाद ही भारतीय टीम के सफलतम कप्तानों में से एक धौनी ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था।

घर के शेर, विदेश में ढेर।
विदेशी सरजमीं पर भारत ने लगातार छठी सीरीज गंवाई है जिसकी शुरुआत 2011 में इंग्लैंड दौरे के साथ हुई थी। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दूसरी बार है जब टीम को इतने लंबे समय तक विदेशों में हार का सामना करना पड़ा है. इससे पहले इंग्लैंड में 1932 में पदार्पण सीरीज से 1955 में वेस्टइंडीज के पहले दौरे तक उसे इस तरह की निराशा का सामना करना पड़ा था।