ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई टीम इंडिया को पहले दोनों वनडे मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. तीन मैचों की इस सीरीज में टीम इंडिया ने 0-2 से पिछड़कर सीरीज गंवा दी है. कंगारू टीम ने दोनों की मैचों में 370 से ज्यादा रन बनाए और टीम इंडिया के जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) और मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) जैसे दो दिग्गज गेंदबाज भी फीके साबित हुए. टीम इंडिया के दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने इस हार के लिए विराट कोहली (Virat Kohli) की कप्तानी को जिम्मेदार ठहराया है.Also Read - IPL Qualifier 2 RR vs RCB Highlights: जोस बटलर का ताबड़तोड़ शतक, रॉयल अंदाज में राजस्थान को दिलाई फाइनल में एंट्री, अब गुजरात से खिताबी भिड़ंत

उन्होंने कहा कि विराट को अपने तेज गेंदबाजों को अच्छे से मैनेज करना चाहिए था. भज्जी ने कहा, ‘नया गेंद बहुत अच्छा हथियार होती है और भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में इसका सही इस्तेमाल करने का तरीका ढूंढना होगा.’ Also Read - राजस्थान के खिलाफ RCB की इस तिकड़ी पर फैंस की निगाहें, खुद आकाश चोपड़ा ने कही ये बात

इंडिया टुडे से बात करते हुए इस दिग्गज ऑफ स्पिनर ने कहा, ‘विराट अपने गेंदबाजों का इस्तेमाल और थोड़ा बेहतर ढंग से कर सकते थे. जब शमी बेहतरीन बॉलिंग कर रहे थे, तब विराट को उनसे थोड़ी ज्यादा गेंदबाजी कराने की जरूरत थी और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने के लिए उस दौरान फील्डिंग को और टाइट करने की कोशिश करनी चाहिए थी.’ Also Read - केएल राहुल की कप्तानी की सबसे बड़ी परीक्षा होगी Ind vs SA टी20 सीरीज, हर कदम पर कड़ी निगरानी रखेगा बोर्ड

40 वर्षीय हरभजन सिंह ने कहा, ‘हमें पता है कि बुमराह (जसप्रीत) मैच विनर गेंदबाज हैं और वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो शुरुआत में ही विकेट ले सकते हैं. लेकिन दुर्भाग्य से वह इस दौरे पर विकेट नहीं निकाल पा रहे हैं.’

बुमराह के इस फीके परफॉर्मेंस का कारण बताते हुए भज्जी ने कहा, ‘स्विंग एक ऐसी चीज है, जिसकी उनकी बॉलिंग में कमी दिख रही है. अगर आप बॉल को कम से कम शुरुआती 2-3 ओवर स्विंग करा सकते हैं, तब अब बल्लेबाज के मन में कई शंकाएं पैदा कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया में तेज गेंदबाजों के लिए मदद होती है और हमारे तेज गेंदबाजों को इसे इस्तेमाल करने का तरीका ढूंढना ही होगा. बुमराह, शमी और यहां तक कि सैनी (नवनीत) को बॉल स्विंग कराने का तरीका ढूंढना ही होगा. नई बॉल तभी कारगर होगी और यही तरीका भारत के पक्ष में काम करता दिखेगा.’