सिडनी टेस्ट में टीम इंडिया (India vs Australia) के युवा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) की शानदार बॉलिंग के साथ-साथ उनके आंसूओं पर भी चर्चा हो रही है. गुरुवार को सिडनी टेस्ट से ऐन पहले इस तेज गेंदबाज की आंखे उस वक्त भर आईं, जब वह राष्ट्रगान के लिए बाकी टीम के साथ मैदान पर खड़े थे. राष्ट्रगान के वक्त मोहम्मद सिराज अचानक भावुक हो पड़े और उनकी आंखों से आंसू छलक गए. दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्होंने इसकी वजह बताई है.Also Read - IND vs NZ, 2nd Test: Ishant Sharma के स्थान पर इस खिलाड़ी को मिलेगा Playing XI में स्थान! खुद वसीम जाफर ने कर दी मांग

इस युवा तेज गेंदबाज ने कहा, ‘राष्ट्रगान के वक्त मेरा ध्यान अचानक मेरे पिता पर चला गया. फिर मैं यही सोचने लगा कि उनकी चाहत थी कि वह मुझे टेस्ट मैच खेलता देखें और अगर आज वह हमारे बीच मौजूद होते तो कितना अच्छा होता.’ उन्होंने कहा कि यही सोचते-सोचने मैं रो पड़ा. Also Read - India vs New Zealand: हाथ की चोट के कारण सिराज दूसरे टी20 से बाहर, तीसरे मैच में खेलने पर संशय

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बता दें 26 वर्षीय इस युवा तेज गेंदबाज के पिता का हाल ही में निधन हो गया था. तब वह टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में ही थे. सिराज पिता के इंतकाल के बाद वापस घर नहीं गए और उन्होंने टीम के साथ ही बने रहने का फैसला किया. यही उनके पिता की भी इच्छा थी. आखिरकार मेलबर्न में उन्हें बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच में अपने टेस्ट डेब्यू का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 5 विकेट निकालकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.

सिडनी टेस्ट में भी वह डेविड वॉर्नर का विकेट अपने नाम कर चुके हैं. पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद टीम इंडिया की ओर से मीडिया को संबोधित करने सिराज ही आए. इस वक्त उनसे भारतीय टीम की रणनीति पर सवाल पूछे गए. इस मौके पर उनसे उनके भावुक होने की बात भी पूछी गई. खेल की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सिडनी का विकेट काफी अच्छा है और यह बल्लेबाजों को रास आ रहा है. ऐसे में दूसरे दिन हमारी कोशिश होगी कि हम ज्यादा से ज्याद डॉट बॉल कराएं और यहां बल्लेबाजों को गलती करने पर मजबूर करें.

विकेटकीपर रिषभ पंत के कैच छोड़ने के सवाल पर इस युवा गेंदबाज ने कहा, ‘कैच छूटने पर गेंदबाज को बुरा तो लगता है लेकिन यह खेल का हिस्सा है और बॉलरों को थोड़े अफसोस के बाद खुद को फिर आगे के लिए तैयार करना होता है. क्योंकि यह खेल में होता ही है और जो हो चुका होता है उसे फिर बदला नहीं जा सकता.’