प्लेइंग इलेवन में चार तेज गेंदबाज होने के बावजूद भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) को लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान बाएं हाथ के स्पिनर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) को अटैक में शामिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन कोहली ने ये फैसला उस समय लिया जब आसमान में बादल थे और हालात पूरी तरह तेज गेंदबाजों के लायक थे।Also Read - मुझे नहीं लगता कि विराट कोहली के कप्तानी छोड़ने के फैसले से RCB टीम को परेशानी हो रही है: ब्रायन लारा

इसका कारण पहले टेस्ट में भारत की धीमी ओवर-रेट थी, जिसके कारण उसे ड्रॉ पहले टेस्ट से हासिल चार में से दो अंक काट दिए गए थे। Also Read - विराट कोहली के कप्तानी छोड़ने के बयान का RCB की हार से कोई लेना-देना नहीं: माइक हेसन

अब जबकि हर टेस्ट मैच आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का एक हिस्सा है और दो साल खत्म होने पर तालिका के शीर्ष पर बने रहना अहम है और ऐसे मे एक-एक अंक मायने रखता है। इसका कारण ये है कि यही अंक जुटाकर केवल दो टीमें ही फाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी। Also Read - KKR vs RCB: विराट ने हार के लिए ओस को ठहराया जिम्‍मेदारी, बोले- ऐसी उम्‍मींद नहीं की थी

जिन हालात में कोहली ने जडेजा से गेंदबाजी कराई, उनके जैसा एक धीमा गेंदबाज परिस्थितियों के अनुकूल नहीं था, खासकर जहां पिच पर अभी भी घास की पट्टियां थीं और टूट-फूट के छोटे निशान थे।

दूसरे शब्दों में, दोनों सिरों पर तेज गेंदबाजों को लगाने की जरूर थी। लेकिन आईसीसी के नए, ओवर-रेट पर कोई छूट ना देने के फैसले की वजह से कोहली को ऐसा करना पड़ा।

जडेजा को नर्सरी एंड से लाया गया था, ताकि गेंद को लॉर्डस के ऐतिहासिक साइड-वे रिज पर ढलान से नीचे किया जा सके। दिलचस्प बात ये है कि जैसे ही उन्होंने अपना चार ओवर का स्पैल पूरा किया, और मोहम्मद शमी ने उनकी जगह ली, रॉय बर्न्‍स पगबाधा करार दिए गए।