भुवनेश्वर, 5 दिसम्बर | हाल के दिनों में अच्छा प्रदर्शन कर रही भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए कलिंगा स्टेडियम में शनिवार से शुरू हो रहे आठ देशों के हीरो चैम्पियंस ट्रॉफी में एक बार फिर खुद को बेहतर साबित करने की चुनौती होगी। एशियाई खेलों में 16 साल बाद स्वर्ण पदक, राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और फिर आस्ट्रेलिया दौरे पर विश्व चैम्पियन को हराकर श्रृंखला जीतने वाली भारतीय टीम के पिछले एक महीने बहुत अच्छे नहीं रहे हैं।

इन तीनों टूर्नामेंट के दौरान टीम के कोच रहे टोरी वॉल्श के विवादास्पद विदाई के बाद चैम्पियंस ट्रॉफी में भारत कैसा प्रदर्शन कर पाता है, यह देखने वाली बात होगी।  निश्चित रूप से सरदार सिंह के नेतृत्व में 18 सदस्यीय टीम नौ दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में जरूर पिछले कुछ महीनों में किए बेहतरीन प्रदर्शनों से प्रेरणा लेते हुए प्रतिद्वंद्वी टीमों के लिए कठिन चुनौती पेश करने का माद्दा रखती है। साथ ही मेजबान होने का फायदा भी टीम को मिलेगा।

भारतीय टीम फिलहाल हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर रोलैंट ओल्टमांस के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रही है। मेजबान भारतीय टीम को पूल-बी में रखा गया है और उसे चैम्पियंस ट्रॉफी में पहला मुकाबला 2008 और 2012 की ओलंपिक चैम्पियन टीम जर्मनी से खेलना है। इसके बाद टीम विश्व कप में कांस्य पदक विजेता अर्जेटीना से रविवार को और फिर ओलंपिक और विश्व कप की रजत विजेता नीदरलैंड्स से मंगलवार को भिड़ेगी।

ओल्टमांस ने हालांकि तैयारियों पर संतुष्टि जताई है और कहा है कि हाल की सफलताओं के बाद भारतीय टीम काफी उत्साहित और आत्मविश्वास से भरी हुई है। भारतीय टीम के लिए जहां उसके स्टार गोलकीपर और उप-कप्तान पी.आर श्रीजेश से एक बार फिर बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद होगी वहीं, डिफेंडर वी. आर. रघुनाथ और रुपिंदरपाल सिंह पर पेनाल्टी कॉर्नर का फायदा उठाने का दारोमदार होगा।

साथ ही, भारत की आक्रमण पंक्ति बहुत हद तक एस.वी. सुनील, आकाशदीप सिंह और निकिन थिमैया पर निर्भर होगी।