नई दिल्ली. भारतीय टीम के साल 2018 की शुरुआत साउथ अफ्रीका दौरे से हुई थी और अंत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट के साथ हो रहा है. इस दौरान भारतीय टीम मैनेजमेंट ने प्लेइंग XI चुनते हुए कई ऐसे फैसले लिए जो विवादों में घिरे रहे और जिसे लेकर काफी चर्चा हुई. आइए एक नजर डालते हैं प्लेइंग XI चुनते हुए साल 2018 में भारतीय थिंक टैंक की 5 बड़ी मिस्टेक पर.

1. साउथ अफ्रीका में रहाणे की जगह रोहित

साउथ अफ्रीका दौरे से पहले विदेशी सरजमीं पर अजिंक्य रहाणे भी विराट कोहली की ही तरह भारत के सबसे कंसिस्टेंट परफॉर्मर थे. SENA कंट्री यानी साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में उनका औसत 48.59 का था. लेकिन, इसके बावजूद केपटाउन में खेले पहले टेस्ट की प्लेइंग XI से उन्हें बाहर कर दिय़ा गया और उनकी जगह रोहित शर्मा को खिलाया गया. रोहित को ये चांस उनके मौजूदा फॉर्म को देखते हुए दिया गया था. रोहित ने इसके बाद दूसरा टेस्ट भी खेला. इन 4 पारियों में रोहित ने सिर्फ 78 रन बनाए, जिसके बाद उन्हें ड्रॉप कर दिया गया. जोहांसबर्ग में खेले तीसरे टेस्ट में रहाणे को मौका मिला और उन्होंने दूसरी पारी में मुश्किल पिच पर 48 रन की दमदार पारी खेली.

2. सेंचुरियन टेस्ट से भुवी को बाहर करना

साउथ अफ्रीका दौरे पर खेले पहले टेस्ट में भुवनेश्वर कुमार टीम इंडिया के बेस्ट बॉलर बनकर उभरे. लेकिन, इसके बावजूद सेंचुरियन में खेले अगले टेस्ट में उन्हें प्लेइंग XI से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह ईशांत शर्मा को शामिल किया गया. कप्तान कोहली के मुताबिक ये फैसला पिच में अतिरिक्त उछाल और ईशांत की हाईट को देखते हुए लिया गया. विराट के इस फैसले का नतीजा टीम इंडिया की हार के तौर पर आया, जिसके बाद वांडरर्स में खेले तीसरे टेस्ट में भुवी की वापसी हुई और वो भारत की जीत के हीरो भी बने.

11 देश, 11 खिलाड़ी… टेस्ट क्रिकेट में साल 2018 की बेस्ट ‘प्लेइंग XI’

3. एजबेस्टन टेस्ट से पुजारा बाहर

साल 2018 के शुरुआती दिनों में पुजारा ने इसी मकसद से इंग्लिश काउंटी यॉर्कशायर को ज्वाइन किया था ताकि वो भारत के इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर सकें. लेकिन, काउंटी चैम्पियनशिप में खराब फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया ने पुजारा को एजबेस्टन टेस्ट से बाहर रखा. एसेक्स के खिलाफ वार्मअप मैच में राहुल और विजय ने अर्धशतक जड़ा और प्लेइंग इलेवन में शामिल हुए. इसके अलावा शिखर धवन को भी मौका मिला. लेकिन, ये तीनों बल्लेबाज एजबेस्टन टेस्ट में फेल हो गए, जिसके बाद पुजारा की सीरीज में वापसी हुई. पुजारा ने ट्रेंटब्रिज टेस्ट में शानदार अर्धशतक ठोका तो साउथैम्पटन में शतक जमाया. इसके बाद पुजारा कभी ड्रॉप नहीं किए गए लेकिन पूरे साल धवन, राहुल और विजय फॉर्म से जूझते रहे. यही नहीं अब तो ये तीनों बल्लेबाज टीम से बाहर भी हो गए हैं.

4. इंग्लैंड की ग्रीन टॉप पर 2 स्पिनर

इंग्लैंड में खेले लिमिटेड ओवर क्रिकेट में कुलदीप यादव अपनी लेफ्ट आर्म रिस्ट स्पिन से काफी धमाल मचा चुके थे. ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में जब अश्विन ने 7 विकेट लिए तो टीम इंडिया ने लॉर्ड्स में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट में 2 स्पिनर के साथ उतरने का मन बनाया और कुलदीप यादव को प्लेइंग XI में चांस दिया. इसे भारतीय थिंक टैंक की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा गया, जो इस बात का अंदाजा लगाने में नाकाम रहे कि लॉर्डस की कंडीशन और ग्रीन टॉप स्पिन की नहीं बल्कि स्विंग और सीम के अनुकूल है. इस मैच में इंग्लैंड जहां 4 तेज गेंदबाजों के साथ उतरा था वहीं भारत के पास सिर्फ 2 फ्रंटलाइन गेंदबाज थे. पूरे मैच में स्पिनर को एक भी विकेट नहीं मिला और भारत को पारी और 159 रन की बड़ी हार का सामना करना पड़ा, जो कि साल 2018 की उसकी सबसे बड़ी टेस्ट हार भी है.

5. पर्थ टेस्ट में 4 तेज गेंदबाज

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक सिर्फ 3 बार ऐसा हुआ है कि टीम इंडिया बिना फ्रंटलाइन स्पिनर के मैदान पर उतरी है, इनमें से 2 बार विराट कोहली की कप्तानी में ही ऐसा हो चुका है. सबसे ताजा मामला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट का ही है. पर्थ के नए ऑप्टश स्टेडियम की ग्रीन पिच को पढ़ने में विराट धोखा खा गए. उन्होंने इसे जोहांसबर्ग की पिच समझ लिय़ा, जहां उनके 5 तेज गेंदबाजों को उतारने का दांव साल की शुरुआत में कामयाब रहा था. अब कोहली को लगा कि पर्थ की पिच भी तेज गेंदबाजों को सूट करेगी और उन्होंने 4 तेज गेंदबाज उतार दिए. कोहली ने इस फैसले से पहले एक बार भी स्पिनर पर विचार नहीं किया, जैसा कि उन्होंने अपने बयान में भी कहा था. विराट का 4 तेज गेंदबाजों को खिलाने का फैसला और विवादित तब हो गया जब उन्होंने चौथे गेंदबाज के तौर पर भुवनेश्वर कुमार के ऊपर उमेश यादव को तरजीह दे दी. उमेश इस टेस्ट में सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए . वहीं ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर नाथन लियॉन सबसे सफल गेंदबाज निकले, जिन्होंने अकेले पर्थ टेस्ट में भारत की हार की राह तैयार की