नई दिल्ली. T20 खत्म. वनडे भी खत्म. अब बारी है असली क्रिकेट यानी टेस्ट क्रिकेट की. बड़ा सवाल ये है कि क्या इस बार इंग्लैंड में क्रिकेट के लंबे फॉर्मेट में भारतीय तिरंगा लहराएगा. क्या टीम इंडिया टेस्ट सीरीज जीतने का धमाल करेगी. जानकार इसे बढ़िया मौका बता रहे हैं लेकिन टीम की मौजूदा हालत को देखते हुए इस मौके को भुनाना विराट एंड कंपनी के लिए आसान नहीं लग रहा.

टीम इंडिया का ताजा हाल

अब जरा टीम इंडिया की मौजूदा परिस्थिति समझिए. भारत की मौजूदा तेज गेंदबाजी की रीढ़ भुवनेश्वर कुमार टीम इंडिया के साथ नहीं हैं. जसप्रीत बुमराह का नाम टेस्ट टीम में जरूर है पर वो खेलेंगे नहीं. टीम के ये दोनों तेज गेंदबाज बुरी तरह से अनफिट हैं और इंग्लैंड के सीमिंग कंडीशन में इन दोनों का टीम में न होना कप्तान कोहली के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.

2011 में ‘चोट’ ने किया था बुरा हाल

अब जरा फ्लैशबैक में चलिए और साल 2011 में हुए टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे को याद कीजिए. उस दौरे पर भारत के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी थे, जिनके लिए टीम की इंजरी ही हार की वजह बन गई थी. एक के बाद एक टीम के खिलाड़ी चोट की चपेट में आते चले गए और धोनी की मुसीबतें बढ़ती चली गईं. नतीजा, ये हुआ कि धोनी की कप्तानी में इंग्लैंड के हाथों 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में टीम इंडिया का सूपड़ा साफ हो गया .

विराट पर धोनी वाला ‘खतरा’

विराट की कप्तानी में टीम इंडिया के मौजूदा हालात भी उसी खतरे की ओर संकेत कर रहे है, जिससे कप्तान साहब को सावधान रहने की जरुरत है. भुवी और बुमराह तो पहले से ही चोटिल है. चोट की वजह से टेस्ट टीम के रेग्यूलर विकेटकीपर साहा भी साथ नहीं हैं. ऐसे में बाकी जो दो विकेटकीपर टीम में हैं उनमें से रिषभ पंत के पास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कीपिंग का कोई अनुभव नहीं है वहीं दिनेश कार्तिक भी लंबे वक्त से इंटरनेशनल क्रिकेट में कीपिंग से दूर हैं.

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चलेगी गेंदबाजी तो जीतेंगे बाजी

साउथ अफ्रीका के पिछले दौरे पर टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज जीती थी तो उसमें भुवी और बुमराह को रोल महत्वपूर्ण रहा था. भुवी ने साउथ अफ्रीका दौरे पर 2 टेस्ट में 10 विकेट चटकाए थे तो बुमराह ने 3 टेस्ट में 14 विकेट लिए थे. इंग्लैंड में भुवी और बुमराह के न होने से ये जिम्मेदारी शमी, उमेश और इशांत के कंधों पर होगी.