नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में कथित तौर पर शामिल क्रिकेटर एस श्रीसंत (Sreesanth) पर बीसीसीआई (BCCI) के आजीवन प्रतिबंध लगाने का आदेश शुक्रवार को निरस्त करते हुये इस शीर्ष क्रिकेट निकाय से कहा कि वह तीन महीने के भीतर प्रतिबंध की अवधि पर पुनर्विचार करे. हालांकि शीर्ष न्यायालय ने बीसीसीआई की अनुशासन समिति के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि इस 36 वर्षीय क्रिकेटर के खिलाफ, बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के भ्रष्टाचार विरोधी संहिता के तहत सट्टेबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हुए हैं. इधर, श्रीसंत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक बार फिर वह क्रिकेट के मैदान में उतर सकेंगे.

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अपने 74 पृष्ठों के फैसले में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि बीसीसीआई की अनुशासनात्मक समिति श्रीसंत को दी जाने वाली सजा की अवधि पर तीन महीने के भीतर पुनर्विचार कर सकती है, जैसा कि भ्रष्टाचार विरोधी संहिता में उल्लेख है. पीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व क्रिकेटर को सजा देने से पहले उसकी अवधि के बारे में उसका पक्ष सुना जाना चाहिए. श्रीसंत को कुछ राहत देते हुए पीठ ने कहा कि उनके इस आदेश का श्रीसंत के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित आपराधिक मामले की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा. दिल्ली पुलिस ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में शामिल श्रीसंत समेत सभी आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत की याचिका पर यह आदेश दिया. श्रीसंत ने इस याचिका में उन पर लगा आजीवन प्रतिबंध बनाए रखने के केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को चुनौती दी थी. इस राहत से प्रसन्न श्रीसंत को उम्मीद बंधी है कि बीसीसीआई अब उन्हें क्रिकेट के मैदान में उतरने का मौका देगी. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि बीसीसीआई देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करेगी और मुझे कम से कम क्रिकेट मैदान में वापस आने देगी.’’ इधर, बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना ने कहा कि विनोद राय की अध्यक्षता वाली प्रशासकों की समिति अदालत के फैसले का संज्ञान लेगी. जहां तक श्रीसंत की मुख्यधारा के क्रिकेट में वापसी का प्रश्न है, वह उस पर टिप्पणी नहीं करेंगे. बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष और केरल क्रिकेट एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिकारी टीसी मैथ्यू ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उसने अपने जीवन के छह सर्वाधिक महत्वपूर्ण वर्ष खो दिए. उन्हें नहीं लगता कि अगर प्रतिबंध हट भी गया तो वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल सकेगा.