बॉलीवुड ही नहीं बल्कि फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक इरफान खान का आज 53 साल की उम्र में कॉलन संक्रमण से निधन हो गया। इरफान ने मुंबई को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अपने परिवारजनों के बीच आखिरी सांस ली। मकबूल, द लंचबॉक्स, हैदर और लाइफ ऑफ पाई जैसी शानदार फिल्मों में काम कर चुके इस दिग्गज को फैंस ने श्रृद्धांजलि दी। Also Read - अपनी आवाज के लिए इस एक्ट्रेस को परफेक्ट मानती हैं तुलसी कुमार, तारीफ में कही ये बात

खेल जगत ने भी इस अभिनेता का आत्मा की शांति की प्रार्थना की। क्रिकेट की दुनिया से इरफान का रिश्ता काफी पुराना है। किसी जमाने में क्रिकेटर बनने की चाह रखने वाले इरफान अपने आखिरी दिनों में भी इस खेल से दूर नहीं थे। दरअसल लंदन के जिस अस्पताल में इरफान ने कैंसर का इलाज करवाया था, वो मशहूर लॉर्ड्स स्टेडियम के सामने थे। इलाज शुरू होने से पहले लिखे आखिरी खत में इरफान ने इसका जिक्र किया था। Also Read - दिग्गज हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह के निधन से दुखी हैं बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार

साल 2018 में टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे इस खत में इरफान ने ये भी बताया कि कैसे विंडीज दिग्गज सर विवियन रिचर्ड्स के मुस्कुराते हुए पोस्टर को देखकर उन्हें दुनिया से अपने अलवाग का एहसास हुआ था। Also Read - ऋषि कपूर-इरफान खान पर शर्मनाक कमेंट करना कमाल राशिद खान को पड़ा भारी, FIR दर्ज

इरफान के खत के मुताबिक, “जब मैं थका-हारा, बिना किसी अनुमान के अपने अस्पताल में जा रहा था तो मुझे एहसास हुआ कि मेरा अस्पताल लॉर्ड्स स्टेडियम के विपरीत दिशा में था। मेरे बचपन का मक्का। इस दर्द के बीच, मैंने विवियन रिचर्ड्स का एक मुस्कुराता हुआ पोस्टर देखा। कुछ नहीं हुआ, जैसे कि ये सब मेरा कभी था ही नहीं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मेरे कमरे के ऊपर अस्पताल का कोमा वार्ड था। एक बार, अस्पताल के कमरे की बालकनी पर खड़े रहने के दौरान, अजीबोगरीब विचार ने मुझे झकझोर दिया। जिंदगी और मौत के खेल के बीच, केवल एक रास्ता है। एक तरफ अस्पताल, दूसरी तरफ स्टेडियम। जैसे कि कोई भी ऐसी किसी चीज का हिस्सा नहीं है जो निश्चितता का दावा कर सकती है – ना तो अस्पताल, ना ही स्टेडियम। तब मुझे इस बात का एहसास हुआ।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं ब्रह्मांड की प्रचंड शक्ति और बुद्धिमत्ता के इस विशाल प्रभाव से घिरा हुआ था। मेरे अस्पताल के स्थान की ख़ासियत ने मुझे प्रभावित किया। एकमात्र निश्चितता, अनिश्चितता ही थी। मैं बस इतना कर सकता था कि मैं अपनी ताकत को पहचानूं और अपना खेल बेहतर तरीके से खेलूं।”