रियो ओलम्पिक में भारतीय एथलीट ओपी जैशा मैराथन के दौरान फिनिश लाइन के पास बेहोश हो गई थी। भारत लौटकर उन्होंने बताया कि जब वो मैराथन में भाग ले रही थी तो भारत की ओर से कोई भी अधिकारी उन्हें पानी तक नहीं देने आया। जबकि मैराथन के नियम के अनुसार हर ढाई किलोमीटर पर पानी के लिए स्टॉल की व्यवस्था करते हैं। जैशा ने कहा था कि वो मर भी सकती थी। एथलेटिक संघ की इस शर्मनाक करतूत के सामने आने के बाद उन्होंने सफाई में कहा है कि जैशा और उसके कोच ने खुद ही एनर्जी ड्रिंक के लिए मना किया था। Also Read - पूर्व केंद्रीय विजय गोयल ने कहा- दिल्ली में बाबर रोड का नाम बदला जाए, '5 अगस्त मार्ग' हो नया नाम

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एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव सी के वाल्सन ने कहा कि यह आयोजकों की जिम्मेदारी होती है कि वे पानी और ड्रिंक मुहैया कराएँ। इसके लिए कई जगह पर एनर्जी ड्रिंक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हम भी खिलाड़ियों को पानी उपलब्ध करवा सकते थे लेकिन न ही खिलाड़ी और न उसके कोच ने इसकी सूचना दी थी कि उन्हें स्पेशल ड्रिंक की जरूरत है। एथलेटिक्स फेडरेशन की यह सफाई आपको भी थोड़ी हास्यास्पद लग सकती है। जैशा ने बताया था कि अन्य देशों के अधिकारी अपने खिलाड़ियों के लिए स्टॉल लगाकर खड़े थे लेकिन नियम के अनुसार वह दूसरे देशों से ड्रिंक नहीं ले सकती थी। Also Read - भाजपा सांसद विजय गोयल ने सम-विषम को बताया चुनावी हथकंडा, कहा- इसका उल्लंघन करूंगा

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भारत की लंबी दूरी की धावक ओ. पी. जैशा ने कहा है की स्‍पर्द्धा के दौरान दौरान तपती धूप में उनको पानी पिलाने या रिफ्रेशमेंट देने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल दल का कोई भी सदस्‍य मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा की पानी और एनर्जी ड्रिंक्स नहीं मिलने की वजह से मैं मर सकती थी। जैशा दो घंटे 7.19 मिनट समय के साथ 89वां स्थान हासिल कर सकीं। जैशा अपना सर्वश्रेष्ठ (2:34.43) समय भी नहीं निकाल पाईं, जो उन्होंने पिछले वर्ष बीजिंग में हुए विश्व चैम्पियनशिप में बनाया था, जहां वह 18वें स्थान पर रही थीं।