क्रिकेट की दुनिया में हर रोज ऐसे कई नाम दर्ज होते हैं जिनके पास उपलब्धियां और कौशलता तो होती हैं मगर वक्त रहते उनके पास सही मौके नहीं पहुंच पाते. इस फेहरिस्त में मौजूद कई खिलाड़ी अपनी बारी का इंतजार करते करते खेलना ही छोड़ देते हैं. वहीं कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो उस वक्त के इंतजार में हर रोज नई कीर्तिमान रचने का प्रयास करते हैं. ऐसा ही एक जुझारू क्रिकेटर है जलज सक्सेना (Jalaj Saxena). जलज ने साल 2005 में अपना पहला पर्दापण प्रथम श्रेणी मैच मध्यप्रदेश के लिए खेला और कुछ नई उम्मीदों की तलाश में केरल पहुंच गया.

केरल टीम का ये काबिल खिलाड़ी अब तक 113 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच खेल चुका है, जिसमें उसके नाम कई रिकॉर्ड भी बन चुके हैं. इंडिया रेड और इंडिया ब्लू के बीच हुए दलीप ट्रॉफी मैच में जलज ने तीन विकेट हासिल कर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने 300 विकेट भी पूरे कर लिए हैं. यही नहीं, इस ऑलराउंडर ने इसके साथ-साथ 6000 से अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ये रिकॉर्ड बना कर जलज, सीके नायडू, मदन लाल, कपिल देव, लाला अमरनाथ, विजय हजारे जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं. 14 साल के क्रिकेट करियर में जलज ने देश को गौरवान्वित महसूस होने के अनेकों मौके दिए हैं. इतने अच्छे रिकार्ड्स के बावजूद जलज को अब तक भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम से दूर रखा गया है. जलज पिछले 4 रणजी ट्रॉफी सीजन में लगातार चार बार बेस्ट ऑलराउंडर का पुरस्कार (लाला अमरनाथ अवॉर्ड) से भी नवाजे जा चुके हैं. हद्द तो तब हो गई जब आईपीएल (IPL) 2019 में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें खरीद कर भी पूरे सीजन बैठाए रखा. बीसीसीआई (BCCI) ने कुछ मौकों पर जलज का पीठ भी थपथपाया है, मगर उन्हें टीम में शामिल करने से परहेज भी रखा है.

जलज से साथ बोर्ड का ये बर्ताव देख कर हर क्रिकेटप्रेमी के दिल में मायूसी घर तो कर ही जाती है, इस ‘नाइंसाफी’ को देख भारतीय क्रिकेट टीम की चयन प्रक्रिया पर ही संदेह होने लगता है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन नहीं होने के सवाल पर जलज कहते हैं, ‘ये मेरे हाथ में नहीं है, ये काम चयनकर्ताओं का है कि वो किसे मौका दें. मेरा काम सिर्फ क्रिकेट खेलना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है. इस लिस्ट में पहले भी बहुत नाम रह चुके हैं जिनमें महाराष्ट्र के बल्लेबाज अमोल मजूमदार का नाम भी शामिल है.