पूर्व भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के मुताबिक इंग्लैंड के सीनियर पेसर जेम्स एंडरसन (James Anderson) दुनिया के एकलौते ऐसे गेंदबाज है जो ‘रिवर्स आउटस्विंगर’ डाल सकते हैं। तेंदुलकर ने इसे ‘रिवर्स’ रिवर्स स्विंग नाम दिया। Also Read - चोट के चलते मिशेल मार्श IPL से हुए बाहर, विंडीज के इस ऑलराडंडर ने ली जगह

अपने 100 एमबी ऐप पर वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा (Brian Lara) के साथ बातचीत में तेंदुलकर ने बताया कि वेस्टइंडीज के खिलाफ एजिस बॉउल में चल रहे पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में एंडरसन इंग्लैंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। तेंदुलकर ने लारा से कहा, ‘‘रिवर्स स्विंग के मामले में जिम्मी एंडरसन संभवत: पहला गेंदबाज है जो रिवर्स स्विंग को भी रिवर्स करता है।’’ Also Read - रोहन गावस्‍कर नहीं मानते बटलर को इंग्‍लैंड का ऑल-टाइम बेस्‍ट बल्‍लेबाज, बोले- ऐसे तो...

तेंदुलकर के अनुसार जब उन्होंने एंडरसन की कलाई की स्थिति पर ध्यान दिया तो उन्होंने उन्हें रिवर्स आउटस्विंगर करते हुए देखा जिसमें कलाई की स्थिति पारंपरिक इनस्विंगर की तरह थी। ऐसा उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। Also Read - IPL 2020 : मुंबई इंडियंस खिलाड़ियों के साथ UAE में दिखे अर्जुन तेंदुलकर, फैंस में खुशी की लहर

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैंने कई बार अनुभव किया कि वो गेंद को ऐसे पकड़ता है जैसे आउटस्विंगर करना चाहता हो लेकिन गेंद छोड़ते समय वो गेंद को अंदर लाने की कोशिश करता है। अधिकतर बल्लेबाज कलाई की स्थिति पर गौर करते हैं और वो असल में क्या करता है। वो आपको दिखाएगा कि वो इनस्विंगर कर रहा है लेकिन गेंद के दोनों हिस्सों के बीच असंतुलन से वो बाहर की तरफ निकलेगी।’’

तेंदुलकर ने कहा कि अपनी कलाई की स्थिति में तेजी से बदलाव करके एंडरसन बल्लेबाज को शॉट मारने के लिए मजबूर कर देता है। उन्होंने कहा, ‘‘वो जो करता है, वो आपको इनस्विंगर खेलने के लिए तैयार करता है और गेंद जब आधी पिच से ज्यादा पार कर लेती है तब वो आपसे बाहर की तरफ निकलना शुरू कर देती है। लेकिन आप तो शॉट खेलने के लिये तैयार हो क्योंकि आपने इनस्विंग की स्थिति देखी है और ये मेरे लिए नया था। कोई ऐसा नहीं करता है।’’

क्या है रिवर्स आउटस्विंगर

अगर सरल शब्दों में कहें तो दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए पारंपरिक स्विंग में गेंद का चमकदार हिस्सा बाहर की तरफ और खुरदुरा हिस्सा अंदर की तरफ होता है। रिवर्स आउटस्विंगर के मामले में गेंद का मूवमेंट बदल जाता है मतलब वो दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बाहर की तरफ निकलती है लेकिन चमकदार हिस्सा बाहर की तरफ ही रहता है लेकिन दोनों मामलों में कलाई की स्थिति अलग होती है।