पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath) ने भारतीय क्रिकेट के उस दौर को याद किया जब कप्‍तान केवल स्पिन गेंदबाजों पर ही विश्‍वास किया करते थे. तेज गेंदबाजों को तरजीह नहीं दी जाती थी. श्रीनाथ ने कहा कि तेज गेंदबाजों पर निर्भरता इतनी कम थी कि कई बार कप्तान से गेंदबाजी मांगनी पड़ती थी. Also Read - IPL 2020: यूएई और श्रीलंका में आयोजित हो सकता है इंडियन प्रीमियर लीग का 13वां सीजन

जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath) ने स्पोटर्सकीड़ा वेबसाइट से बातचीत के दौरान कहा, “मैं शिकायत नहीं कर रहा हूं, लेकिन उस समय स्थिति ऐसी ही थी. भारत में ऐसा भी समय था कि हम सिर्फ एक तेज गेंदबाज लेकर खेलते थे वो भी सिर्फ नाम के लिए की टीम में तेज गेंदबाज है. पिचें पूरी तरह से स्पिनरों के लिए होती थीं.” Also Read - 'यदि भारत खेलने के लिए तैयार हो जाए तो हम 23 की जगह 13 मैचों के आयोजन पर विचार कर सकते हैं'

श्रीनाथ (Javagal Srinath) ने मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में अक्टूबर और नवंबर में 1991 में क्रमश: वनडे और टेस्ट पदार्पण किया था. “आप टीम के स्थायी सदस्य बनना चाहते हैं और विकेट लेना चाहते हैं. तीन स्पिनर 80-90 प्रतिशत गेंदबाजी करते थे. मैं कई बार अलग सा महसूस करता था कि मेरा यहां क्या रोल है. मैं कप्तान के पास जाकर कहता था कि गेंदबाजी दे दो. कम से कम मुझे इस बात की संतुष्टि करने दो की मैं टीम में हूं.” Also Read - ...जब जवागल श्रीनाथ का मूड ठीक करने के लिए सचिन ने की ये शरारत, हेमांग बदानी ने सुनाया पूरा किस्सा, VIDEO देखें

दाएं हाथ के पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, “यह मामला था. भारतीय परिस्थितयां स्पिनरों की मददगार थीं, लेकिन साथ ही यह तेजी वाले मोड में सोचने को मजबूर कर देती थीं. इसलिए रिवर्स स्विंग मदद करती थी, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी. मैं समझता था कि जीत ज्यादा जरूरी है.”