लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक झटके में बीसीसीआई अध्यक्ष सहित सचिव अजय शिर्के को क्लिन बोल्ड कर दिया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल न करना इतना भारी पड़ गया कि अनुराग ठाकुर को अध्यक्ष पद से हाथ धोना पड़ा और पवेलियन वापस लौटना पड़ा।

जस्टीस लोढ़ा ने कुछ इस तरह जमाई थी फिल्डिंग

मई 2013 में स्पॉट फिक्सिंग सामने आई। बुकीज, खिलाड़ियों और फ्रेंचाइजी मेंबर्स के बीच साठगांठ सामने आई तो अक्टूबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मुकुल मुदगल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। इस कमेटी ने चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दोषी माना। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से और अजय शिर्के को सचिव के पद से हटाया

चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स समेत आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के दोषियों के खिलाफ सजा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2015 में जस्टिस आरएम लोढ़ा की चेयरमैनशिप में 3 मेंबर की कमेटी बनाई। यहीं से जस्टिस लोढ़ा का रोल शुरू हुआ।

88 साल पुराने दुनिया के इस सबसे अमीर बोर्ड की नीव इतनी मजबूत थी बावजूद इसके जस्टिस लोढ़ा ने इसे पूरा हिलाकर रख दिया। सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कप्तानी करती करते हुए बेहतरी पारी खेली। जस्टिस लोढ़ा की अगुआई में जनवरी 2015 में कमेटी बनाई गई थी।

जस्टिस लोढ़ा ने छह महीने का वक्त मांगा और जुलाई 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी को दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। इतना ही नहीं साथ ही CSK के CEO गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल के ओनर राज कुंद्रा के क्रिकेट से जुड़ी किसी भी एक्टिविटी में हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी।

स्पॉट फिक्सिंग मामले में सजा तय करने के बाद जस्टिस लोढ़ा ने फिर 6 महीने का वक्त लिया और जनवरी 2016 में बीसीसीआई में बड़े बदलाव की सिफारिश की। ये सिफारिशें ऐसी थीं जिनसे बीसीसीआई में ऊंचे पद पर बैठे लोगों का बोर्ड पर कंट्रोल पूरी खत्म होने वाला था।

जस्टिस लोढ़ा ने सिफारिश की कि एक स्टेट का एक वोट होगा। इससे पहले महाराष्ट्र, गुजरात जैसे स्टेट में तीन-तीन क्रिकेट एसोसिएशन थे। उन सभी के वोट काउंट होते थे। यह भी कहा गया कि ऑफिशियल्स की टर्म फिक्स होगी।

कोई मंत्री बीसीसीआई में पोस्ट नहीं ले सकेगा। 70 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी शख्स बोर्ड में जिम्मेदारी नहीं संभाल सकेगा। अनुराग ठाकुर इन तमाम सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्हें इस खामियाजा भुगतना पड़ा।

कमेटी की सिफारिशों का असर इतना ज्यादा रहा कि दो IPL टीमें बैन कर दी गईं।

लोढ़ा कमेटी के चलते पहले शरद पवार, महाराष्ट्र स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन की प्रेसिडेंट की पोस्ट से LBW हुए।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीधे गेंदबाजी करते हुए सबसे महंगे क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को क्लीन बोल्ड किया।

साथ ही अजय शिर्के की सचिव पद से रन आऊट हो गए।