आईपीएल 2009 में एक 19 साल के तेज गेंदबाज ने तहलका मचा दिया था. उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर बिना कोई प्रथम श्रेणी मैच खेले सीधे उसका सिलेक्शन राजस्थान रॉयल्स के लिए हुआ था.

कभी रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोने वाले इस खिलाड़ी की प्रतिभा को राजस्थान रॉयल्स ने पहचान लिया था और उसे सीधे दक्षिण अफ्रीका की टिकट मिल गई थी. इस खिलाड़ी का नाम है कामरान खान. आईपीएल 2009 में वह शेन वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेले और 11 विकेट झटकते हुए अपनी तरफ सबका ध्यान खींचा.

कामरान ने इस आईपीएल के पहले टाई मैच के बाद सुपर ओवर फेंका था और केकेआर के खतरनाक बल्लेबाज गेल को आउट करके राजस्थान को यादगार जीत दिला दी थी. लेकिन उसक बाद कामरान के गेंदबाजी ऐक्शन को लेकर सवाल उठे और उन्हें दो हफ्ते के रिहैबलिटेशन के लिए जाना पड़ा.

खेतों में काम करने को मजबूत कामरान खान
कामरान फिर वापस लौटे लेकिन उनकी गेंदबाजी पहले जैसी नहीं रही और फिर कभी वह 140 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी नहीं कर पाए. धीरे-धीरे वह राजस्थान की टीम से बाहर हुए और फिर उन्हें किसी भी टीम की तरफ से खेलने के मौके मिलने बंद हो गए.

2011 में उन्हें पुणे वॉरियर्स ने चुना लेकिन यहां भी उनकी किस्मत खराब रही और घुटने की चोट के कारण वह टूर्नामेंट से बाहर हो गए. इसके बाद कामरान खान को भुला दिया गया. अब तो हालत ये है कि अपना जीवन यापन करने के लिए वह अपने भाई के खेतों में काम करते हैं.

दिग्गज ऑस्ट्रेलिया ऑफ स्पिनर शेन वॉर्न ने कामरान की स्थिति पर दुख जताते हुए कहा था, ये जानकार हैरान हूं कि कामरान आईपीएल में न खेलकर खेतों में काम कर रहे हैं. एक प्रतिभा को जाया कर दिया गया. वॉर्न ने सवाल उठाते हुए कहा था, अगर आईपीएल से बीसीसीआई पैसे कमा रही है तो खिलाड़ियों को भी कमाना चाहिए!

वॉर्न की बात में दम है, लेकिन सवाल तो ये है कि क्या कामरान जैसे खिलाड़ियों की वजह से आईपीएल से करोड़ों रुपये कमाने वाला बीसीसीआई एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बदहाल स्थिति से उबारने के लिए कभी कुछ करेगा?