नई दिल्ली. मेलबर्न में टीम से ड्रॉप होने के बाद सिडनी में लोकेश राहुल को एक मौका और मिला. इस बार पारी की शुरुआत उन्हें मयंक अग्रवाल के साथ करनी थी. घरेलू क्रिकेट में ये जोड़ी कर्नाटक के लिए काफी रन बना चुकी है. लिहाजा, सिडनी में भी उम्मीद कुछ वैसी ही थी. लेकिन, ये क्या लोकेश राहुल तो दूसरे ओवर की तीसरी ही गेंद पर लपक लिए गए. जोश हेजलवुड की गेंद पर राहुल का कैच फर्स्ट स्लिप में खड़े शॉन मार्श ने लपका. राहुल सिर्फ 9 रन ही बना सके.

इतने बुरे फॉर्म में हैं राहुल

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज में राहुल ने अब तक 5 पारियां खेली हैं, जिसमें सिर्फ 1 बार ही वो दहाई का आंकड़ा लांघ सके हैं. अब इससे अंदाजा लगा लीजिए कि उनका फॉर्म कितना बुरा है. वैसे टेस्ट क्रिकेट में राहुल की फ्लॉप कहानी का चैप्टर 1 साल से भी ज्यादा लंबा है. साल 2018 की शुरुआत से अब तक राहुल ने 19 बार भारतीय पारी की शुरुआत की है. इस दौरान सिर्फ 7 बार ही वो क्रीज पर 10 से ज्यादा ओवर टिक सके हैं.

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पिछले 1 साल में बिगड़ा खेल

टेस्ट क्रिकेट में राहुल का मौजूदा औसत 35.27 का है. जबकि यही औसत 2017 के अंत तक 44.62 का था. यानी, राहुल की क्रिकेट के साथ जो भी खेल हो रहा है वो पिछले 1 साल से ही हो रहा है. क्योंकि उसके पहले उनके लिए लगभग सब ठीक-ठाक चल रहा था. इसे जरा साल दर साल के उनके बैटिंग औसत के हिसाब से समझिए.

साल दर साल राहुल का ग्राफ

राहुल ने साल 2015 में 31.5 की औसत से 8 टेस्ट में 252 रन बनाए. 2016 में उनका टेस्ट औसत बढ़कर 60 के करीब जा पहुंचा. 2016 में राहुल ने 59.9 की औसत से 9 टेस्ट में 539 रन बनाए. 2017 में राहुल का औसत 48.7 का रहा और उन्होंने 14 टेस्ट में 633 रन बनाए. अब ये देखिए 2018 में राहुल का औसत कैसे औंधे मुंह गिरा और सिर्फ 22.7 का रह गया. इस साल वो 22 टेस्ट में 468 रन ही बना सके.

गावस्कर की सलाह

साफ है जैसा कि भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी कहा है राहुल में कॉन्फिडेंस की भारी कमी दिख रही है और यही वजह है कि वो गेंद को खेलते वक्त कंफर्ट जोन में नहीं दिख रहे. गावस्कर ने कहा कि इसके लिए राहुल को घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए और वहां बड़े स्कोर कर अपने कॉन्फिडेंस को हासिल करना चाहिए.