नई दिल्ली: न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में टीम इंडिया की जीत में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के शुरुआती झटकों की जितनी भूमिका रही, उतनी ही अहम भूमिका युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की जोड़ी ने निभाई. शमी ने न्यूजीलैंड के टॉप ऑर्डर को सस्ते में निपटाया तो इन दोनों स्पिनर्स ने मिड्ल और लोअर ऑर्डर के बल्लेबाजों को क्रीज पर जमने का कोई मौका नहीं दिया. 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी के कई बार ऐसा देखने को मिला है कि चहल-कुलदीप की जोड़ी टीम इंडिया के लिए जीत का रास्ता तैयार करने में सफल रही है. कहा जाता है कि तेज गेंदबाज जोड़ियों में ज्यादा सफल रहते हैं, लेकिन यह बात स्पिनर्स की इस जोड़ी पर भी लागू होती है. आंकड़े बताते हैं कि जब भी ये दोनों एक साथ टीम में होते हैं, तो विपक्षी टीमों के लिए ज्यादा मारक साबित होते हैं.

चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से टीम इंडिया ने अब तक 44 मैच खेले हैं. इस दौरान 23 मुकाबलों में युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव दोनों टीम में शामिल रहे हैं. हालांकि, बीच-बीच में रविंद्र जडेजा भी टीम का हिस्सा रहे हैं और ऐसी हालत में इन दोनों में से किसी एक को बाहर बैठना पड़ता है. टीम कॉम्बिनेशन के हिसाब से नतीजे कैसे रहे हैं, इसे इन आंकड़ों से समझ सकते हैं.

1. कुलदीप के साथ कोई अन्य स्पिनर: टीम इंडिया 44 में से 11 मैचों में इस कॉम्बिनेशन के साथ उतरी है. इन मैचों में कुलदीप के साथ जडेजा, अश्विन या अक्षर पटेल टीम का हिस्सा रहे हैं. इनमें से 8 में टीम को जीत मिली है. स्पिन गेंदबाजों ने इन मैचों में 4.36 रन प्रति ओवर देकर 36 विकेट लिए हैं. कुलदीप ने इन मुकाबलों में 25.27 की औसत से 12 विकेट अपने नाम किए हैं.

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2. चहल के साथ कोई अन्य स्पिनर: 44 में से 9 मैचों में चहल के साथ जडेजा, अक्षर पटेल या वाशिंगटन सुंदर टीम में शामिल रहे हैं. जीत को पैमाना मानें तो यह कॉम्बिनेशन सबसे सफल रहा है क्योंकि टीम को 8 मैचों में जीत मिली है. हालांकि, इस कॉम्बिनेशन को विकेटों के लिए ज्यादा गेंदें फेंकनी पड़ती हैं और रन भी ज्यादा खर्च करना पड़ता है. स्पिन गेंदबाजों के इस कॉम्बिनेशन ने 9 मैचों में 35.39 की स्ट्राइक रेट और 5.09 की इकोनॉमी से 29 विकेट लिए हैं.

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3. चहल और कुलदीप एक साथ: चैंपियंस ट्रॉफी के बाद 44 में से 23 मैचों में ये दोनों एक साथ टीम का हिस्सा रहे हैं. इनमें से 16 मैच टीम इंडिया जीती है. 23 में से 18 मुकाबले ऐसे रहे हैं जिनमें टीम में कोई तीसरा स्पिनर नहीं था. इन मैचों में चहल-कुलदीप ने 75 विकेट लिए हैं लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों साथ हों तो विपक्षी गेंदबाजों को ज्यादा रन बनाने का मौका नहीं देते और स्ट्राइक रेट भी किसी अन्य कॉम्बिनेशन के मुकाबले सबसे कम है. साथ रहते हुए दोनों प्रति ओवर 5 से कम रन दिए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 26.17 रहा है.

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चहल और कुलदीप के साथ होने का फायदा यह है कि ये दोनों बीच के ओवरों में विकेट निकालते हैं. 2017 के बाद से कुलदीप यादव ने 15-40 ओवर के बीच 42 विकेट लिए हैं जबकि चहल के नाम पर 33 विकेट हैं. इसका एक पहलू यह भी है कि चहल साथ हों तो कुलदीप ज्यादा घातक साबित होते हैं. चहल की गैर मौजूदगी में कुलदीप का बॉलिंग एवरेज 25.3 और स्ट्राइक रेट 33.6 का है. वहीं, चहल साथ हों तो उनका एवरेज कम होकर 19.9 और स्ट्राइक रेट 24 हो जाता है. यानी चहल साथ हों तो अपने हर विकेट के लिए कुलदीप 5.4 रन कम खर्च करते हैं और विकेट भी जल्दी निकालते हैं.