नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका ने दुनिया को बेहतरीन क्रिकेटर दिए हैं जिसमें से ज्यादातर रंगभेद के कारण लगे प्रतिबंध की वजह से रिकॉर्ड्स में अपनी जगह नहीं बना सके. 1992 के बाद जब दक्षिण अफ्रीका ने इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की, तब क्रिकेट में एक बार फिर बेहतरीन क्रिकेटर आने शुरू हो गए. इस कड़ी में लांस क्लूजनर (Lance Klusener) दुनिया के एक बहुत ही अनोखे क्रिकेटर के तौर पर सामने आए. क्लूजनर बुधवार को अपने जन्मदिन की 48वीं सालगिरह मना रहे हैं. लांस एक बेहतरीन ऑलराउंडर रहे, लेकिन वह 1999 विश्वकप के लिए याद किए जाते हैं जिसमें वे बेहतरीन खेल दिखाने के बावजूद हीरो बनते-बनते रह गए थे.

पहले केवल गेंदबाज ही थे क्लूजनर

दक्षिण अफ्रीका में डरबन के नटाल में 4 सितंबर 1971 को जन्मे लांस क्लूजनर को जुलू के निकनेम से जाना जाता है. स्कूल के दिनों में लांस की प्रतिभा सामने नहीं आई. क्रिकेट करियर के शुरुआत में वे केवल एक गेंदबाज के तौर पर पहचाने जाते थे और बल्लेबाजी करने अमूमन आखिरी बैट्समैन के तौर पर मैदान में उतरा करते थे, लेकिन बाद में उनका स्लॉग हिटिंग का अंदाज दुनिया भर में मशहूर हो गया वे एक बेमिसाल ऑलराउंडर के तौर पर जाने गए. 1999 तक जब उनका सर्वश्रेष्ठ दौर आया, वे एक ऐेसे खिलाड़ी हो चुके थे जिनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं था और विरोधी टीमें उनके आउट होने से पहले जीत के बारे में सोच भी नहीं पाती थीं.

दक्षिण अफ्रीका टीम के बैटिंग कोच हैं लांस

इस समय क्लूजनर भारत आने की तैयारी कर रहे हैं. वे आगामी 15 सितंबर से शुरू हो रही दक्षिण अफ्रीका के भारत दौरे की अपने देश की टीम के बैटिंग कोच नियुक्त किए गए हैं. दक्षिण अफ्रीका को भारत के खिलाफ तीन टीम मैच और उसके बाद तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है. टी20 टीम की कप्तानी क्विंटन डि कॉक कर रहे हैं जबकि टेस्ट टीम की कमान फॉफ डु प्लेसिस कर रहे हैं.

इंटरनेशनल करियर का शानदार आगाज

क्लूजनर ने 1996 में टीम इंडिया के खिलाफ अपने करियर का पहला टेस्ट खेला और पहले ही मैच में उन्होंने धूम मचा दी थी. कोलकाता में हुए इस टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 21.3 ओवर में केवल 64 रन देकर टीम इंडिया के 8 विकेट लिए और अपनी टीम को 329 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. इस मैच में उनके साथी गैरी कर्स्टन ने दोनों पारियों में सेंचुरी ठोकी थी. क्लूजनर इस मैच की पारी में केवल 10 रन बना पाए थे जबकि दूसरी पारी में उन्हें बैटिंग करने का मौका नहीं मिला था.

1999 विश्व कप, करियर का शानदार टूर्नामेंट

क्लूजनर को लोग इंग्लैंड में हुए 1999 के विश्व कप के सेमीफाइनल में अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके, लेकिन वहां तक पहुंचाने में भी उन्हीं का हाथ रहा. क्लूजनर ने टूर्नामेंट में चार मैन ऑफ द मैच अवार्ड जीते और केवल दो बार आउट किए जा सके. टूर्नामेंट में उन्होंने 140.50 के औसत और 122.17 के स्ट्राइक रेट से 9 मैचों की 8 पारियों में 281 रन बनाए और 20.58 के औसत से 17 विकेट लिए. इसमें कीनिया के खिलाफ 21 रन देकर 5 विकेट उनका सबसे शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन था.

1999 में जहां क्लूजनर हीरो बनकर सामने आए तो वहीं 2003 विश्व कप में वे अपनी टीम को सुपर सिक्स में नहीं पहुंचा सके जब श्रीलंका के खिलाफ उनकी टीम केवल एक रन से हार कर विश्व कप से बाहर हो गई. इस मैच में क्लूजनर ने 8 गेंदों पर केवल एक रन बनाया था. टीम के विश्व कप से बाहर होने का कारण भी उन्हीं को माना गया था.