नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के विकेट कीपर और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army) के मानद कर्नल भी हैं. विश्व कप के सेमीफाइनल मैच में न्यूजीलैंड से मिली हार के बाद संन्यास की खबरों के बीच हाल ही में धोनी ने दो महीने तक क्रिकेट के मैदान से अलग रखने का फैसला किया था. भारतीय टीम के वेस्टइंडीज दौरे से पहले लिए गए इस फैसले को धोनी के क्रिकेट छोड़ने से जोड़कर देखा गया. लेकिन इन खबरों के शांत पड़ जाने के बाद धोनी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार धोनी का जिक्र बतौर कर्नल उनकी नई पोस्टिंग को लेकर हो रहा है.

जी हां, टेरिटोरियल आर्मी ने अपने लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) एमएस धोनी (Lieutenant Colonel MS Dhoni) को ड्यूटी पर ज्वाइन कराने का निर्णय लिया है. महेंद्र सिंह धोनी 106 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन (पैराशूट रेजीमेंट) का हिस्सा होंगे. यह रेजीमेंट अभी कश्मीर में विक्टर फोर्स के साथ तैनात है. धोनी को अपनी बटालियन के साथ कश्मीर में तैनाती दी जाएगी. टेरिटोरियल आर्मी के निर्देशानुसार महेंद्र सिंह धोनी को 31 जुलाई से लेकर 15 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर में अपनी बटालियन का हिस्सा बनकर रहना होगा. इस दौरान धोनी के लिए काम भी तय कर दिए गए हैं.

महेंद्र सिंह धोनी को कश्मीर में तैनाती के दौरान सेना द्वारा तय किए गए वे सभी काम करने होंगे, जो उनकी रैंक के अफसर को अलॉट किए जाते हैं. इसके तहत धोनी को पेट्रोलिंग, गार्ड और पोस्ट ड्यूटी पर लगाया जाएगा. भारतीय सेना के नियमों के मुताबिक अपनी ड्यूटी के तहत धोनी को अपने ट्रुप के साथ ही रहना होगा. एनडीटीवी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के अन्य जवानों की तरह धोनी को भी ट्रेनिंग दी जाएगी. आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी जिस बटालियन के अधीन मानद कर्नल हैं, उसका मुख्यालय बेंगलुरू में है. इस बटालियन को अभी सेना के साथ मिलकर कश्मीर में तैनाती दी गई है.

यह गौरतलब है कि महेंद्र सिंह धोनी ने 4 साल पहले ही पैराट्रुपर की ट्रेनिंग पूरी कर ली थी. इसी वजह से उन्हें 106 टेरिटोरियल आर्मी की पैराशूट रेजीमेंट के साथ तैनाती दी गई है. भारतीय सेना के किसी पैराट्रुपर को पूरी ट्रेनिंग के बाद ही ड्यूटी पर तैनात किया जाता है. धोनी ने वर्ष 2015 में आगरा के ट्रेनिंग कैंप में भारतीय सेना के एयरक्राफ्ट से पांच सफल पैराशूट-कूद का प्रशिक्षण ले रखा है. यानी क्रिकेटर धोनी सेना के तय नियमों के हिसाब से एक प्रशिक्षित पैराट्रुपर भी हैं, इसलिए अगले महीने के शुरुआती 15 दिनों में सेना उनकी सेवा लेगी.