नई दिल्ली: महेंद्र सिंह धोनी भारत की वनडे टीम का हिस्सा बने रहेंगे- ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज जीत में अपने धमाकेदार प्रदर्शन से उन्होंने इसको लेकर सारी शंकाएं दूर कर दीं. टीम में उनकी जगह को लेकर अब शायद ही सवाल किए जाएं, लेकिन बैटिंग ऑर्डर में उनकी जगह क्या हो, यह बहस अब नए सिरे से शुरू हो चुकी है. हालांकि, सीरीज के अंतिम मैच के बाद खुद धोनी ने इस बहस को ज्यादा महत्व देने से इंकार कर दिया. धोनी ने स्पष्ट कहा कि वे टीम की जरूरत के हिसाब से मिड्ल ऑर्डर या पारी के अंत में फिनिशर की भूमिका निभा सकते हैं.

इसके बावजूद बैटिंग ऑर्डर में धोनी की जगह को लेकर चल रही बहस की दो बड़ी वजहें हैं- पहली तो भारत की वनडे टीम में नंबर 4 पर बल्लेबाजी कौन करेगा, यह तय नहीं है. दूसरा कारण यह है कि 37 साल के धोनी अब पहले की तरह मैदान पर उतरते ही लंबे शॉट्स नहीं लगा सकते. एक कारण यह भी है कि केदार जाधव और खासकर दिनेश कार्तिक ने पिछले कुछ मुकाबलों में अपने प्रदर्शन से जताया है कि वे भी टीम के लिए फिनिशर बन सकते हैं.

धोनी लंबे समय से टीम इंडिया के फिनिशर रहे हैं. अपने 15 साल लंबे करियर में उन्होंने सबसे ज्यादा पारियां नंबर पांच और छह पर ही खेली हैं और अपनी टीम की कई जीतों के सूत्रधार बने. धोनी ने अब तक 335 वनडे मैच खेले हैं. इसकी 284 में से 126 पारियां उन्होंने नंबर छह की पोजिशन पर खेली हैं जबकि 75 मैचों में वे नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए आए. अब तक केवल 30 पारियों में ही उन्हें नंबर चार पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला है.

अलग-अलग पोजिशन पर धोनी की बैटिंग के आंकड़े देखें तो एवरेज और स्ट्राइक रेट के हिसाब से वे सबसे ज्यादा सफल नंबर तीन पर रहे हैं. नंबर तीन पर 16 पारियों में उन्होंने 82.75 की औसत और 99.69 की स्ट्राइक रेट से 993 रन बनाए हैं. लेकिन फिलहाल भारतीय टीम में नंबर तीन पर कोई वैकेंसी नहीं है क्योंकि इस पोजिशन पर कप्तान विराट कोहली बल्लेबाजी करते हैं. इसके बाद धोनी का सबसे अच्छा रिकॉर्ड नंबर चार पर ही है. इस पोजिशन पर बैटिंग करते हुए उन्होंने 30 पारियों में 1358 रन बनाए हैं. इसमें उनका एवरेज 56.58 और स्ट्राइक रेट 92.82 का है.

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वहीं, नंबर पांच और छह पर बल्लेबाजी करते हुए धोनी अक्सर अपनी टीम के लिए फिनिशर की भूमिका निभाते हैं. पांच नंबर पर उन्होंने 75 पारियों में 51.66 की औसत से 2945 रन बनाए हैं. छठे नंबर पर बैटिंग करते हुए 126 पारियों में उनके खाते में 4031 रन हैं, लेकिन इस पोजिशन पर उनका एवरेज और स्ट्राइक रेट सबसे कम है. दरअसल, यदि इन आंकड़ों को देखें तो बैटिंग ऑर्डर में उनका क्रम जैसे-जैसे नीचा होता है, एवरेज और स्ट्राइक रेट में कमी आती है.

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अधिकांश एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि इस साल होने वाले वर्ल्ड कप में धोनी को नंबर चार पर बैटिंग करनी चाहिए. इसके पक्ष में वे ये तर्क देते हैं कि इससे धोनी को पिच पर जमने का समय मिलेगा और वे पूरी पारी को नियंत्रित कर सकते हैं. उनका यह भी मानना है कि टीम के पास फिलहाल ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं है जो नंबर चार पर बल्लेबाजी कर सके. अंबति रायुडू ने उममीद जरूर जगाई थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो मैचों में खराब प्रदर्शन के बाद उनका दावा संदेह के घेरे में है. दिनेश कार्तिक भी दावेदार हो सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कार्तिक टिक कर बड़ी पारी खेलने के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं हैं. आंकड़ों और टीम की जरूरत के नजरिये से देखें तो धोनी नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं.

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हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बैटिंग ऑर्डर का निर्धारण टीम की जरूरत और मैच की हालत पर निर्भर करता है. टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर यह है कि धोनी हर जगह बैटिंग करने को तैयार हैं.