नई दिल्लीः माधव आप्टे को घरेलू क्रिकेट के दिग्गजों में शामिल किया जाता है लेकिन सात टेस्ट मैचों में लगभग 50 के औसत के बावजूद वह अपने टेस्ट करियर को उतना लंबा नहीं खींच पाए जितने की उम्मीद लोगों ने की थी. दायें हाथ के इस पूर्व बल्लेबाज का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हो गया. यह बता पाना मुश्किल है कि वेस्टइंडीज की महान टीम के खिलाफ उसकी सरजमीं पर 1952-53 श्रृंखला में तीन अर्धशतक और 163 रन की पारी खेलने के बावजूद वह इस श्रृंखला के बाद आखिर सिर्फ एक ही टेस्ट क्यों खेल पाए.

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आप्टे ने अपने 542 टेस्ट रन में से 460 रन वेस्टइंडीज दौरे पर बनाए लेकिन इस श्रृंखला के बाद सिर्फ एक टेस्ट खेल पाए. संपन्न व्यापारिक परिवार में पैदा हुए आप्टे को एक प्रभावी खिलाड़ी होने के बावजूद अपने और टेस्ट नहीं खेल पाने में राजनीति नजर आई और उनका मानना था कि महान खिलाड़ी लाला अमरनाथ उस समय उन्हें बाहर किए जाने का कारण थे.

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वर्षों बाद आप्टे ने अपनी आत्मकथा ‘ऐज लक वुड हैव इट- अनप्लग्ड अनकट’ में अपना पक्ष रखा. आप्टे ने अपनी आत्मकथा में लिखा, ‘‘टेस्ट क्रिकेट से अचानक मेरे बाहर होने का कभी कोई कारण नहीं बताया गया विशेषकर प्रभावी रिकार्ड के बावजूद.’’

उन्होंने लिखा, ‘‘लाला अमरनाथ ने चयन समिति की बैठक की अध्यक्षता की. दूसरे टेस्ट (संयुक्त टीम के खिलाफ) के दौरान उन्होंने मुझसे संपर्क किया और मेरे पिता से मिलने का अग्रह किया. वह दिल्ली में कोहिनूर मिल्स के कपड़ों के वितरण का अधिकार चाहते थे. वह घर आकर मेरे पिता से मिले.’’

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आप्टे के अनुसार, उनके पिता लक्ष्मण आप्टे समझ गए कि यह मुलाकात क्यों हो रही है. आप्टे ने अपनी आत्मकथा में लिखा, ‘‘भाऊसाहेब पर्याप्त समझदार थे कि चीजों को समझ सकें. वह और मैं दोनों ही मेरे क्रिकेट करियर और व्यवसाय को आपस में नहीं जोड़ते. उन्होंने शिष्टता के साथ लाला का वितरण का प्रस्ताव ठुकरा दिया. लाला कुछ और वर्षों तक चयन समिति के अध्यक्ष रहे. मुझे कभी दोबारा टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए नहीं चुना गया.’’

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हालांकि मुंबई क्रिकेट को पहचानने वाले लोग आप्टे को खेल के प्रति उनके प्यार के लिए याद करते हैं. अनुभवी पत्रकार मकरंद वायंगणकर ने याद करते हुए कहा, ‘‘वह 50 साल तक कांगा लीग में खेले. वह आखिरी बार उस समय खेले जब 71 बरस के थे. वह बेदाग सफेद कपड़ों में किट बैग और छाते के साथ आम खिलाड़ी की तरह आते थे. 60 से अधिक की उम्र में उन्होंने अबे कुरुविला का सामना किया जो उनसे आधी उम्र का था.’’ मकरंद देश से बाहर रहने के दौरान भी आप्टे के खेल के प्रति प्यार को याद करते हैं. उन्होंने बताया कि आप्टे कुआलालंपुर या सिंगापुर से भी फोन करके अपने क्लब जाली क्रिकेटर्स के कांगा लीग के कार्यक्रम के बारे में पूछते थे.

अगर उन्हें पता चलता था कि मौसम अच्छा है तो वह मैच खेलने के लिए विमान से स्वदेश लौट आते थे और वह भी तब जब उनकी उम्र 50 साल से अधिक थी. मकरंद ने बताया, ‘‘वह आते थे और भारी बारिश हो रही होती थी. मैच नहीं होता था और वह विमान से वापस सिंगापुर लौट जाते थे. अब लोगों के पास पैसा है लेकिन क्या आप इस जज्बे की बराबरी कर सकते हो.’’ उन्होंने बताया, ‘‘वह किशोर अवस्था में प्रोफेसर डीबी देवधर के साथ खेले और 50 साल से अधिक की उम्र में, सचिन तेंदुलकर नाम के बच्चे के साथ.’’