नई दिल्ली : पूर्व भारतीय कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने कहा है कि उन्होंने सही समय पर कप्तानी छोड़ी ताकि विश्वकप के लिए उनके उत्तराधिकार को सही टीम बनाने का समय मिल सके. धोनी ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ने के साथ-साथ टेस्ट से संन्यास भी ले लिया था. अपनी कप्तानी में भारत को 2007 में टी-20 विश्व कप, 2011 में विश्वकप और 2013 में चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब दिला चुके धोनी इसके बाद केवल सीमित ओवरों में ही कप्तानी कर रहे थे. Also Read - Shikhar Dhawan को मिली टीम इंडिया की कमान, देश की अगुआई को बताया 'सम्मानजनक'

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लेकिन अक्टूबर 2016 में उन्होंने टी-20 और वनडे से भी कप्तानी छोड़ दी थी. इसके बाद विराट कोहली तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हैं. धोनी ने एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए दुबई रवाना होने से पहले अपने ग्रह नगर रांची में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “मैंने कप्तानी से इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि मैं चाहता था कि नए कप्तान को विश्वकप-2019 की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके. नए कप्तान को पर्याप्त समय दिए बिना मजबूत टीम का चयन करना संभव नहीं है.” Also Read - विराट vs बाबर : Shoaib Akhtar की माने तो कवर ड्राइव खेलने के मामले में बाबर से पीछे हैं विराट

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दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम भारत को हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर 1-4 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी. भारत ने इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से पहले एसेक्स के साथ तीन दिन का केवल एक अभ्यास मैच खेला था.

धोनी का मानना हैं कि टेस्ट में असफलता का मुख्य कारण अभ्यास मैचों का न खेलना था. उन्होंने कहा, “भारतीय टीम, खासकर बल्लेबाजों की विफलता का मुख्य कारण अभ्यास मैचों का न होना था. भारतीय टीम सीरीज से पहले अभ्यास मैच खेलने से चूक गई. इस वजह से बल्लेबाजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.”

पूर्व कप्तान ने कहा, “यह सब खेल का हिस्सा है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मौजूदा समय में भारत रैंकिंग में नंबर-1 टीम है.”