नई दिल्ली: चेन्नई सुपरकिंग्स के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने स्वीकार किया है कि आईपीएल से दो साल के प्रतिबंध के दौरान उनकी फ्रेंचाइजी को मुश्किल समय का सामना करना पड़ा और उनके खिलाड़ी खिताब जीतने के लिए प्रेरित थे. स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण 2013 में टीम प्रबंधन की भूमिका के कारण दो साल के प्रतिबंध के बाद वापसी कर रहे सीएसके ने रविवार रात फाइनल में सनराइजर्स हैदराबाद को आठ विकेट से हराकर तीसरा आईपीएल खिताब जीता. शेन वॉटसन ने सुपरकिंग्स की ओर से 57 गेंद में नाबाद 117 रन की पारी खेली. Also Read - PSL 2020 Karachi Kings vs Lahore Qalandars, Final Predicted XI: खिताबी भिड़ंत में इन खिलाड़ियों को मिल सकती है प्लेइंग इलेवन में जगह

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फ्लेमिंग ने टीम की खिताबी जीत के बाद कहा, ‘‘फ्रेंचाइजी के लिए दो साल का समय मुश्किल रहा. प्रतियोगिता में दोबारा वापसी करने की इच्छा तीव्र थी. खिलाड़ी प्रेरित थे (जीत के लिए).’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे गर्व है कि महत्वपूर्ण लम्हों पर कैसे अलग अलग खिलाड़ी भूमिका निभाने के लिए खड़े रहे. अनुभवी खिलाड़ियों ने जिस तरह रास्ता दिखाया उस पर मुझे गर्व है. हमारा मानना था कि टूर्नामेंट में वापसी करते हुए अनुभव हमारे लिए महत्वपूर्ण होगा.’’ सीएसके ने इससे पहले 2010 और 2011 में भी आईपीएल खिताब जीता जबकि टीम को 2016 और 2017 सत्र से निलंबित किया गया. Also Read - रुतुराज गायकवाड़ ने याद की धोनी के साथ पहली मुलाकात'; कहा- उनके साथ खेलना सपना पूरे होना जैसा

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फ्लेमिंग ने कहा कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और सुरेश रैना जैसे खिलाड़ी जो निरंतरता लेकर आए उसने भी टीम के अभियान में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रदर्शन में निरंतरता के लिए अनुभव को तवज्जो देते हैं, खिलाड़ी जो लगातार योगदान देते हैं, किसी एक मैच में नहीं. धोनी और रैना जैसे खिलाड़ी आपको टूर्नामेंट में काफी आगे ले जा सकते हैं.’’

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गौरतलब है कि चेन्नई ने महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में आईपीएल का तीसरा खिताब जीता. इससे पहले टीम ने 2010 और 2011 में जीत हासिल की थी. चेन्नई ने सीजन 2010 में मुंबई इंडियन्स को 22 रन से हराया था. वहीं सीजन 2011 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को 58 रन से मात दी थी. खास बात यह है कि चेन्नई ने आईपीएल में सात बार फाइनल मैच खेल चुकी है. चेन्नई आईपीएल 2008, 2012, 2013 और 2015 फाइनल खेल चुकी है. हालांकि इन सभी सीजन्स में टीम को दूसरे स्थान पर रहना पड़ा था.