पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आरपी सिंह (RP Singh) का कहना है कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के साथ उनकी दोस्ती ने उनके करियर में कोई भूमिका नहीं निभाई है। Also Read - Prithvi Shaw में दूसरा Virender Sehwag बनने की क्षमता: पूर्व चयनकर्ता

दाएं हाथ के पेसर ने उन अफवाहों के जवाब में ये बयान दिया जो साल 2008 में शुरू हुईं थी, जब भारतीय चयनसमिति की बैठक से जुड़ी कुछ जानकारियां मीडिया में लीक हुईं थी। खबरों के मुताबिक धोनी ने कहा था कि अगर चयनकर्ता इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में आरपी सिंह की जगह इरफान पठान (Irfan Pathan) को देंगे तो वो कप्तान पद से इस्तीफा दे देंगे। Also Read - अगर बॉलिंग नहीं कर सकते Hardik Pandya तो छोटे फॉर्मेट में भी फिट नहीं: पूर्व सिलेक्टर

12 साल बाद यूपी के इस क्रिकेटर ने उस अफवाहों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि उस लीक से मैं प्रभावित हुआ था। जिस इंग्लैंड सीरीज की बात हो रही है, मुझे इंदौर में एक भी विकेट नहीं मिला था।
जाहिर है लोग सोचते हैं कि उन्हें दो या तीन और मौके मिलेंगे। लेकिन ये होना नहीं था। कुछ लोगों को पांच मौके मिलते हैं, खुशकिस्मत लोगों को दस मौके भी मिलते हैं।” Also Read - पूर्व इंग्लिश बल्लेबाज इयान बेल ने याद किया 2011 का 'रन आउट विवाद'; कहा- मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था

स्पोर्ट्स तक से बातचीत में इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा, “ऐसा मेरे साथ खई बार हुआ, जब भी मेरा प्रदर्शन खराब हुआ, मुझे सीधा घरेलू क्रिकेट खेलने भेज दिया दिया गया। कई बार लोग फॉर्म खराब होने पर भी टीम में रहते हैं और उन्हें अच्छी प्रैक्टिस मिलती है। जैसे ही आप घरेलू क्रिकेट में लौटते हैं, आपको उस स्तर की प्रतिद्वंद्विता नहीं मिल पाती है।”

तत्कालीन कप्तान धोनी के साथ अपनी दोस्ती को लेकर उन्होंने कहा, “हमने (धोनी और मैंने) इस बात पर चर्चा की थी कि मैं कहां सुधार कर सकता हूं, खुद को बेहतर करने के लिए क्या कर सकता हूं। मैं एमएस धोनी को जानता हूं। दोस्ती अलग चीज है लेकिन देश की टीम का नेतृत्व करना अलग है। उस समय, मुझे लगता है कि उसने उन लोगों को आगे बढ़ने में मदद की जो उसके हिसाब से बेहतर थे। उसने उन लोगों को आगे बढ़ाया जो उसकी योजना में फिट बैठ रहे थे।”

उन्होंने आगे कहा, “इसी वजह से एमएस धोनी आज एमएस धोनी है। क्रिकेट को लेकर उसके निष्पक्ष राय और फैसला लेने की क्षमता। मैंने उतना क्रिकेट नहीं खेला, जितना मैं खेल सकता था क्योंकि मेरी गति कम हो गई और मेरी स्विंग भी खत्म हो गई। बाकी सारी चीजें इसके बाद आती है। अगर मैंने सुधार कर लिया होता तो मैं और खेलता लेकिन मैं अपनी उपलब्धियों से खुश हूं।”

2005 में भारत के लिए डेब्यू करने वाले आरपी सिंह ने अपने करियर में 14 टेस्ट, 58 वनडे और 10 टी20 मैच खेले हैं।