क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कप्तान विराट कोहली कुशलतापूर्वक भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व करने में सक्षम हैं, क्योंकि रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ी उनके पास उनकी टीम में हैं.  उन्होंने कहा कि किसी की कप्तानी की दक्षता वास्तव में तब होती है जब आप आईपीएल में फ्रेंचाइजी का नेतृत्व करते हैं.

गंभीर ने एक विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत करते हुए संवाददाताओं से कहा ‘कोहली पिछले विश्व कप में बहुत अच्छे थे, लेकिन अभी उन्हें एक लंबा रास्ता तय करना है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतनी अच्छी कप्तानी की क्योंकि उनका साथ  रोहित शर्मा ने बखूबी निभाया था, उन्होंने एमएस धोनी को लंबे समय तक देखा था. कप्तानी की विश्वसनीयता तब दिखाई देती है जब आप किसी फ्रैंचाइज़ी का नेतृत्व कर रहे होते हैं, जब आपके पास दूसरे खिलाड़ी नहीं होते हैं आपका समर्थन करने के लिए’.

भाजपा सांसद ने कहा ‘जब भी मैंने इस बारे में बात की है, मैं ईमानदार रहा हूं. आप देखिए रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस के लिए क्या हासिल किया है, चेन्नई सुपर किंग्स के लिए धोनी ने क्या हासिल किया है. यदि आप आरसीबी के साथ इनकी तुलना करते हैं, तो आपको परिणाम साफ तौर पर दिख जाता है’.

विराट कोहली और गौतम गंभीर

पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज ने रोहित शर्मा के पक्ष में बात करते हुए कहा कि यदि आप उन्हें टीम में लेते हैं तो उन्हें प्लेइंग एलेवेन का हिस्सा बनाइए. रोहित जैसा खिलाड़ी बेंच पर बैठने के लिए नहीं हैं. गंभीर ने टीम में केएल राहुल की जगह पर बात करते हुए कहा कि उन्हें बहुत मौके दे दिए गए. गंभीर ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने 50 ओवर के विश्व कप टीम से बाहर रहने के बाद 2007 में क्रिकेट छोड़ने के बारे में भी सोचा था. भारत साल 2007 में कैरेबियन में  50 ओवर के विश्व कप में अपनी निराशाजनक प्रदर्शन से ग्रुप चरण में ही बाहर हो गया था. हालांकि, उसी वर्ष, एमएस धोनी  के नेतृत्व में भारत ने दक्षिण अफ्रीका में पहला टी -20 विश्व कप जीता था और गंभीर इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहें थे.

गंभीर ने कहा, ‘ साल 2007 में जब मैं 50 ओवर के विश्व कप से बाहर हो गया था तब ये पल मेरे क्रिकेट करियर का सबसे निराश भरा पल था. इससे पहले, मैं अंडर -14 और अंडर -19 विश्व कप दोनों के लिए नहीं चुना गया था . 2007 में मुझे लगा कि मैं विश्व कप खेलने के सबसे करीब था, लेकिन जब उन्होंने मुझे टीम में शामिल नहीं किया, तब मैंने क्रिकेट का फैसला ले लिया’. 37 वर्षीय गंभीर को इस साल की शुरुआत में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये सम्मान उन्हें और जिम्मेदार बनाएगा.

दिल्ली में क्रिकेट की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, गंभीर ने कहा कि नवोदित क्रिकेटरों को संघों और चयन समिति से बहुत मदद नहीं मिलती है, यही कारण है कि वे राष्ट्रीय टीम में आने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता को समझते हैं. गंभीर ने कहा, ‘दिल्ली में, आपको कई लोगों से मदद नहीं मिलती है, एसोसिएशन और चयन समिति भी बहुत मदद नहीं करती है, इसलिए लोग समझते हैं कि भीड़ के बीच खड़े होने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी . यहां की सुविधाएं, बुनियादी ढांचे इतने महान नहीं हैं’.  लिस्ट-ए क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने के बाद गंभीर ने साल 2018 में संन्यास की घोषणा कर दी थी .