कोविड-19 महामारी के बाद जब क्रिकेट मैच शुरू होंगे तब खिलाड़ी गेंद को चमकाने के लिए क्या पहले जैसे थूक या पसीने का इस्तेमाल कर सकेंगे. ये सवाल सबके मन में है. कइयों का कहना है कि खिलाड़ियों को इससे बचना चाहिए तो कई ये कह रहे हैं कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को इसकी जगह कोई अन्य विकल्प की तलाश करनी चाहिए. खासकर टेस्ट क्रिकेट में गेंद की चमक को बरकरार रखने और स्विंग हासिल करने के लिए गेंदबाज थूक का इस्तेमाल करते हैं. Also Read - ICC Meeting: टी20 विश्‍व कप 2020 के भविष्‍य को लेकर फैसला 10 जून तक स्‍थगित

कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसकी खिलाफत की है, लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने कहा है कि गेंदबाजों को थूक और पसीने से गेंद चमकाने से रोका जाना चाहिए. Also Read - अनिल कुंबले और वीवीएस लक्ष्मण ने इस साल IPL आयोजन की उम्मीद जताई, जानिए पूरी डिटेल

प्रसाद ने स्टार स्पोर्ट्स तेलुगू के एक कार्यक्रम में कहा, ‘नियम कहते हैं कि आप गेंद को चमकाने के लिए अतिरिक्त चीजों का इस्तेमाल नहीं कर सकते, क्योंकि यह बॉल टेंपरिंग की श्रेणी में आता है. फिर भी खिलाड़ी गेंद को चमकाने के लिए अपने पसीने और थूक का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस तरीके पर रोक लगा देनी चाहिए और आईसीसी को कुछ अलग विकल्पों के साथ आना चाहिए.’ Also Read - लॉकडाउन में अंडर-19 खिलाड़ियों को मिली ये सीख, जानिए राहुल द्रविड़ की जुबानी

‘वनडे और टी-20 में ज्यादा समस्या नहीं आएगी’

हाल में भारत के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने कहा था कि उन्हें लगता है कि सफेद गेंद के क्रिकेट को इससे समस्या नहीं होगी. इस पेसर के मुताबिक, ‘यहां तक कि वनडे में आप 25-25 ओवर के लिए दो नई गेंद लेते हो. सफेद गेंद के क्रिकेट में ‘रिवर्स स्विंग’ कभी भी अहम नहीं रही है. जहां तक सफेद गेंद का संबंध है तो नई गेंद के लिए आपको पसीने या लार की जरूरत नहीं पड़ती.’