नई दिल्ली, 9 दिसम्बर | इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठे संस्करण में हुई कथित सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्िंसग मामले की सुनवाई कर रही सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटाए गए एन. श्रीनिवासन को आड़े हाथों लेते हुए मंगलवार को पूछा कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड की कार्यसमिति में हिस्सा क्यों लिया। न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर और फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला की पीठ ने श्रीनिवासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा, “एक तरफ आप कहते हैं कि कि आप बोर्ड के निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रहेंगे जबकि दूसरी ओर तमिलनाडु क्रिकेट संघ के माध्यम से आप बीसीसीआई की कार्यसमिति में हिस्सा लेते हैं।”

न्यायालय ने श्रीनिवासन से कहा, “आप तीन हफ्ते पहले बीसीसीआई की बैठक में हिस्सा लेते हैं। आपने अदालत से जो कहा है कम से कम उसे तो आपको निभाना चाहिए और खुद को अलग रखना चाहिए।” न्यायालय की यह टिप्पणी बिहार क्रिकेट संघ द्वारा दायर की गई जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान आई। उल्लेखनीय है कि इसी मामले की सुनवाई के तहत न्यायालय ने श्रीनिवासन को बीसीसीआई से दूर रहने को कहा था।

आईपीएल में कथित सट्टेबाजी और उसमें श्रीनिवासन के दामाद तथा चेन्नई सुपरकिंग्स के टीम अधिकारी गुरुनाथ मयप्पन के नाम आने के बाद हितों के टकराव को लेकर भी न्यायालय सुनवाई कर रही है।  इसी साल मार्च में न्यायालय ने बीसीसीआई के उपाध्यक्ष शिवलाल यादव को बोर्ड का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सुनील गावस्कर को उस समय जारी आईपीएल टूर्नामेंट से जुड़े कामकाज को संभालने को कहा था।

उस समय श्रीनिवासन ने अदालत को बताया था कि उनके खिलाफ जांच जारी रहने तक वह क्रिकेट बोर्ड से दूर रहेंगे। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने श्रीनिवासन से यह पूछा, “आप बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं। आपके दामाद पर आरोप हैं। ऐसे में प्रश्न है कि उन्हें सजा कौन देगा। हम चाहते हैं कि बीसीसीआई निष्पक्ष या किसी भी प्रकार की तरफदारी से दूर रहे।” साथ ही अदालत ने पूछा कि क्या यह सही नहीं होगा कि श्रीनिवासन पर अगले दास साल तक बीसीसीआई के चुनाव लड़ने पर रोक लगा देना चाहिए।

इस पर श्रीनिवासन के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर अदालत चाहे तो एक स्वतंत्र अनुशासन समिति भी बना सकती है जो हितों के टकराव का मामला भी देखेगी। इस पर न्यायालय ने श्रीनिवासन से कहा अगर हितों का टकराव सही पाया जाता है तो खेल के भविष्य के लिए इसे इजाजत नहीं दी जा सकती। साथ ही न्यायालय ने कहा कि अगर वह बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहते हैं तो चेन्नई सुपर किंग्स में उनका निवेश खतरे में पड़ जाएगा।