कोविड-19 महामारी की वजह से लॉकडाउन में गैर अनुबंधित और अंडर-19 खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य की सीख मिली है. ये कहना है नेशन क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रमुख और पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ का. द्रविड़ ने खुलासा किया है कि इस दौरान गैर अनुबंधित और अंडर-19 खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर पेशेवरों की मदद से गौर किया गया. Also Read - बिहार: कोरोना मरीजों की संख्या 12 हजार पार, अब तक 97 मौतें, 24 घंटे में मिले 280 मरीज

टीम इंडिया की ‘दीवार’ रहे द्रविड़ ने राजस्थान रॉयल्स के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आयोजित वेबीनार में स्वीकार किया कि क्रिकेटरों के लिए यह अनिश्चितता भरा दौर है जिससे वे मानसिक तौर पर प्रभावित हो सकते हैं. Also Read - नहीं होगा टी20 विश्व कप; इंग्लैंड दौरे की तैयारी में जुटी ऑस्ट्रेलिया टीम

बकौल द्रविड़, ‘लॉकडाउन में हमने इस मुद्दे (पेशेवरों के जरिए खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर काम) पर गौर करने की कोशिश की. हमने अनुबंध सूची से बाहर और अंडर-19 खिलाड़ियों की पहचान की. हमने उन्हें पेशेवरों की मदद लेने का मौका दिया.’ Also Read - कोरोना: महाराष्ट्र के इस जिले में 10 से 18 जुलाई तक लागू होगा सख्त लॉकडाउन, जानें डिटेल

‘हमारे लिए यही अच्छा था कि हम इसके लिए पेशेवरों की मदद लें’

द्रविड़ ने कहा, ‘पूर्व क्रिकेटर होने के नाते मेरा मानना है कि पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट कोच के पास इस तरह के मसलों से निबटने की विशेषज्ञता नहीं है जिनसे की इन दिनों कुछ युवा गुजर रहे हैं. हमारे लिए यही अच्छा था कि हम इसके लिए पेशेवरों की मदद लें.’

उन्होंने स्वीकार किया कि क्रिकेट में मानसिक स्वास्थ्य एक मुद्दा है लेकिन साथ ही खुशी भी व्यक्त की कि अब इस पर लगातार चर्चा हो रही है.

‘अतीत में खिलाड़ी इसे स्वीकार करने में हिचकिचाते थे’

द्रविड़ ने कहा, ‘यह ऐसा माहौल होता है जिसमें खिलाड़ी पर काफी दबाव होता है. अतीत में खिलाड़ी इसे स्वीकार करने में हिचकिचाते थे लेकिन कुछ खिलाड़ियों के खुलकर सामने आने से अब इसको लेकर बेहतर चर्चा होने लगी है.’

द्रविड़ पिछले कुछ समय से जूनियर क्रिकेटरों के साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले वह भारत अंडर-19 और भारत ए के कोच रह चुके हैं और अब एनसीए के प्रमुख हैं.