नई दिल्‍ली: टेस्‍ट सीरीज में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का पहला मैच शनिवार को खेलेगी. टीम इंडिया की निगाहें इस सीरीज को जीतने पर तो होंगी ही, वर्ल्‍ड कप से पहले वह इस सीरीज में अपने टीम कॉम्बिनेशन के उन पहलुओं का जवाब भी चाहेगी जो अब तक उलझे हैं. यह जरूरी इसलिए भी है क्‍योंकि वर्ल्‍ड कप से पहले टीम इंडिया को केवल 13 वनडे मैच खेलने हैं. उपकप्‍तान रोहित शर्मा ने हालांकि कहा है कि वर्ल्‍ड कप के लिए टीम कॉम्बिनेशन करीब-करीब तय है, लेकिन उन्‍होंने साथ में यह भी जोड़ा कि टीम में जगह पक्‍की करने के लिए फॉर्म और फिटनेस दोनों महत्‍वपूर्ण होंगे. इस नजरिए से देखें तो टीम को अपने विकेटकीपर, ऑलराउंडर और स्पिन अटैक के बारे में अंतिम फैसला लेना है.

विकेटकीपर: महेंद्र सिंह धोनी के रहते टीम में दूसरे विकेटकीपर की चर्चा थोड़ा आश्‍चर्यचकित करने वाला है, लेकिन माही की उम्र और फॉर्म को देखते हुए इस पर बहस जरूरी भी है. धोनी 38 साल के हो चुके हैं. इससे भी अहम यह है कि पिछले 22 वनडे मैचों में वे एक भी हाफ सेंचुरी नहीं लगा पाए हैं. उनके बल्‍ले से अंतिम हाफ सेंचुरी दिसंबर, 2017 में श्रीलंका के खिलाफ धर्मशाला में निकला था. इतना ही नहीं, पिछले एक-डेढ़ साल से धोनी की बल्‍लेबाजी में वो लय भी नहीं दिखाई दी, जिसके लिए वे जाने जाते हैं. पिछले 22 मैचों की केवल दो पारियों में ही उन्‍होंने 100 से ज्‍यादा की स्‍ट्राइक रेट से रन बनाए हैं. लंबे समय से टीम के फिनिशर रहे धोनी के खेल पर उम्र का असर दिखने लगा है, हालांकि विकेट के पीछे वे अब भी उतने ही चुस्‍त और फुर्तीले हैं. दूसरी ओर, टीम में उनके बैक अप के रूप में शामिल दिनेश कार्तिक को हाल के दिनों में जब भी मौका मिला है, उन्‍होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. धोनी की तरह कार्तिक भी टीम की जरूरत के हिसाब से मिड्ल ऑर्डर या फिनिशर की भूमिका में आ सकते हैं. ऐसे में धोनी के लिए ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ ये सीरीज बेहद महत्‍वपूर्ण है. यदि शुरुआती कुछ मैचों में वे अपनी बैटिंग फॉर्म हासिल करने में सफल रहे तो कोई मुश्किल नहीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो कार्तिक के लिए संभावनाएं बन सकती हैं.

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ऑलराउंडर: भारतीय टीम के लिए ऑलराउंड खिलाडि़यों की कमी लंबे समय से बड़ी समस्‍या रही है, लेकिन अभी टीम इंडिया के पास दो ऑलराउंडर ऐसे हैं जो लगातार अच्‍छा प्रदर्शन कर रहे हैं और अनुभवी भी हैं. अच्‍छी बात यह भी है कि इनमें से एक फास्‍ट बॉलिंग ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या है तो दूसरा स्पिन ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा. अब सवाल यह है कि टीम में इन दोनों की जगह हो या किसी एक की. वनडे मैचों में कप्‍तान के पास जितने बॉलिंग ऑप्‍शन हों, उतना अच्‍छा माना जाता है. लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि ऑलराउंडर के हिसाब से टीम को अपने बॉलिंग कॉम्बिनेशन में बदलाव करना होगा. हार्दिक पांड्या को टीम में जगह मिली तो वे टीम के तीसरे तेज गेंदबाज भी होंगे. वहीं, जडेजा को शामिल किया जाए तो वे टीम में दूसरे स्पिन गेंदबाज की भूमिका भी निभाएंगे. ऐसी हालत में वनडे टीम के नियमित स्पिनर- युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव में से एक को बाहर बैठना पड़ सकता है.

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स्पिन अटैक: इस पर चर्चा इसलिए क्‍योंकि टीम इंडिया की पहली पसंद तयशुदा रूप से युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव हैं, लेकिन दोनों को टीम में शामिल करने से लोअर ऑर्डर बैटिंग कमजोर हो जाती है. इसका दूसरा पक्ष देखें तो पिछले एक-दो वर्षों में अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में कलाई के स्पिन गेंदबाजों का चलन बढ़ा है. खासकर वनडे और टी20 मैचों में उनकी सफलता की दर फिंगर स्पिनर्स से अच्‍छी रही है. लेकिन वर्ल्‍ड कप जैसे टूर्नामेंट में टीम को इंग्‍लैंड की पिचों का भी ध्‍यान रखना होगा जहां शुरुआती ओवर्स में गेंदबाजों को काफी स्विंग मिलती है और कई बार टॉप ऑर्डर के जल्‍दी पवेलियन लौटने का खतरा भी होता है. ऐसी हालत में जडेजा जैसे बल्‍लेबाज टीम को संभालने का काम कर सकते हैं. वर्ल्‍ड कप से पहले के इन मैचों में भारतीय टीम मैनेजमेंट जरूर इस पर अंतिम फैसला लेना चाहेगा.