त्रिपुरा के लोग बड़ी ही उत्सुकता के साथ रियो ओलम्पिक में भारतीय महिला जिमनास्ट दीपा करमाकर की रविवार को होने वाली स्पर्धा का इंतजार कर रहे हैं। दीपा के पिता दुलाल करमाकर और मां गौरी देवी तथा उनकी बड़ी बहन पूजा इस स्पर्धा में उनकी जीत के लिए प्रार्थनाएं कर रहे हैं।  रियो ओलम्पिक में रविवार को दीपा पोल वॉल्ट स्पर्धा फाइनल में प्रदर्शन करेंगी। भारतीय खेल प्राधिकरण में भारोत्तोलन कोच दुलाल ने आईएएनएस को बताया, “हमें कोई चिंता नहीं है लेकिन बेसब्री से टेलीविजन पर दीपा के की स्पर्धा का इंतजार कर रहे हैं। केवल हमें ही नहीं, हमारे रिश्तेदारों तथा पड़ोसियों को भी इसका इंतजार है।” Also Read - Underwater Gymnastics: पानी में उतरी हुस्न की मल्लिका, करती रही गजब कलाबाजियां, देखकर दिल दे बैठेंगे जनाब...

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दीपा की सफलता के लिए कुछ स्थानीय क्लब तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हवन का आयोजन भी किया। सामाजिक कार्यकर्ता सुशांता चौधरी ने कहा, “हम एक बड़े यज्ञ का आयोजन कर रहे हैं, ताकि दीपा देश के लिए पदक जीत कर लाएं। अगर वह पदक जीतती हैं, तो पूरे देश हमेशा के लिए उनका आभारी हो जाएगा।” दीपा ने ओलम्पिक खेलों में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली महिला जिमनास्ट बनकर पहले ही इतिहास रच लिया था। इसके साथ वह 52 साल बाद ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली जिमनास्ट हैं।

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पिछली बार ओलम्पिक खेलों में भारत ने 1964 में हिस्सा लिया था लेकिन उस वक्त इस प्रकार की कोई क्वालीफिकेशन प्रक्रिया नहीं थी। अभी तक 11 भारतीय पुरुष जिमनास्ट ओलम्पिक खेलों में हिस्सा ले चुके हैं। दीपा की बड़ी बहन पूजा करमाकर ने कहा, “वह केवल मेरी छोटी बहन ही नहीं है, बल्कि एक सच्ची दोस्त भी है। उसकी बचपन से ही खेल में रुचि थी तथा इसके तकनीकी और हर छोटी-बड़ी चीजों को जानने के लिए उत्सुक रहती थी।” योगा कार्यकर्ता पूजा ने कहा, “छठी कक्षा में यहां नेताजी सुभाष रीजनल कोचिंग सेंटर जाने के बाद उसने जिमनास्टिक को चुना और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

पूजा ने आईएएनएस को बताया कि वे सब रविवार को दीपा की स्पर्धा को देखने के लिए रातभर जागेंगे। त्रिपुरा खेल मंत्री शाहिद चौधरी ने कहा कि जिमनास्टिक में दीपा की सफलता से राज्य और देश के लोग गौरवांन्वित हैं। चौधरी ने आईएएनएस को बताया, “तहेदिल से हम रविवार को उनकी जीत और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। केवल त्रिपुरा के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लोगों को यकीन हैं कि वह पदक जरूर जीतेंगी और एक नया इतिहास रचेंगी।” त्रिपुरा के जिमनास्ट और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित मंतु देबनाथ ने आईएएनएस को बताया, “राज्य के युवा लड़के और लड़कियों जिमनास्टिक में काफी कुशल हैं और अगर उन्हें अवसर तथा समर्थन मिलता है, तो वह अपनी प्रतिभा को दर्शाएंगे।

दीपा की स्कूल की अध्यापिका मिनाती देबनाथ ने जिमनास्टिक में भारतीय महिला जिमनास्ट के शुरुआती दिनों को याद करते हुए आईएएनएस को बताया कि उन्होंने 2002 में नोर्थ ईस्ट खेल समारोह में पहली बार स्वर्ण पदक जीता था।