भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इस समय प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर हैं. धोनी ने अपना अंतिम मैच इस साल इंग्लैंड में आयेाजित वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था.Also Read - IND vs SL: Hardik Pandya का फ्लॉप शो जारी, टि्वटर पर भड़के फैन्स, बोले- गरीबों का बेन स्टोक्स

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क्रिकेट से दूर होने के बावजूद धोनी जहां कहीं भी जाते हैं फैंस उनका पीछा नहीं छोड़ते. वैसे भारतीय क्रिकेट और 183 के आंकड़े में काफी करीबी संबंध है और फैंस के पास इस संख्या को याद रखने के अपने कारण हैं.

अधिकांश के लिए यह वह स्कोर है जिसका भारत ने 1983 विश्व कप में वेस्टइंडीज की मजबूत टीम के खिलाफ फाइनल में सफलतापूर्वक बचाव किया था. कुछ के लिए यह टानटन में विश्व कप में सौरव गांगुली की एतिहासिक पारी का स्कोर है.

लेकिन बेंगलुरु के प्रणव जैन के लिए लिए 183 का मतलब महेंद्र सिंह धोनी के करियर की सर्वश्रेष्ठ वनडे इंटरनेशनल पारी है और 22 साल के प्रणव का मिशन भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक के 183 ऑटोग्राफ हासिल करना है.

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प्रणव 153 ऑटोग्राफ हासिल कर चुके हैं

कोलकाता आने से पहले ही प्रणव 153 ऑटोग्राफ हासिल कर चुके हैं. ग्लव्स, बल्लों, पोस्टर, स्कैच जैसी चीजों पर धोनी के ऑटोग्राफ लेने के लिए प्रणव दुनिया भर के देशों की यात्रा कर चुके हैं. धोनी विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के एक अन्य कप्तान कपिल देव के साथ एक विज्ञापन की शूटिंग के लिए यहां आए हैं.

कोलकाता के रिसॉर्ट में धोनी के शूट पूरा करने का इंतजार कर रहे प्रणव ने कहा, ‘‘माही भाई (महेंद्र सिंह धोनी) ने मुझे 183 ऑटोग्राफ  का वादा किया है लेकिन एक शर्त के साथ. उन्होंने मुझे कहा है कि ‘जिस दिन तेरे 183 ऑटोग्राफ पूरे होंगे, तुझे और ऑटोग्राफ नहीं मिलेंगे’. मेरी आज 10 ऑटोग्राफ लेने की योजना है और यह 163 हो जाएंगे.’