अंडर-19 विश्‍व कप अगले साल जनवरी में साउथ अफ्रीका में खेला जाना है. जिसके लिए भारतीय टीम की घोषिणा की जा चुकी है. भारतीय टीम की कप्‍तानी कर रहे युवा प्रियम गर्ग बेहद गरीब परिवार से आते हैं. उन्‍होंने बेहद कठित पारिवारिक स्थितियों का सामना करते हुए भारतीय जूनियर टीम तक का सफर तय किया है.

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प्रियम गर्ग के पिता मेरठ में स्‍कूल बस चलाते हैं. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानने वाले प्रियम गर्ग 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं. न्‍यूजी एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान गर्ग ने कहा, “हम पांच भाई बहन हैं और मेरे पिता नरेश गर्ग के पास इतना पैसा नही था कि वो इतने बड़े परिवार के साथ मुझे क्रिकेट खेलने के लिये संसाधन भी उपलब्ध करा सकें. हालांकि इसके बावजूद पिता ने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए पूरा सपोर्ट दिया.’’

प्रियम गर्ग ने आगे बताया,‘‘क्रिकेट के प्रति मेरी दीवानगी को देखते हुए पिता ने अपने दोस्‍त से कर्ज लिया और मुझे क्रिकेट किट दिलवाई और कोचिंग की भी व्यवस्था की. मैं आज पिता के त्‍याग की वजह से ही अंडर-19 विश्व कप क्रिकेट टीम का कप्तान हूं.”

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प्रियम गर्ग की मां का देहांत साल 2011 में हो गया था. “मां भी मुझे भारत के लिए क्रिकेट खेलता देखना चाहती थी. दुख की बात है कि मैं अंडर-19 टीम के लिए भारत का नेतृत्‍व करने जा रहा हूं और मां मेरे साथ नहीं हैं. .”

10वीं कक्षा में पढ़ने वाले प्रियम गर्ग अपने स्‍ट्रगल के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि वो पढाई के साथ साथ रोजाना सात से आठ घंटे क्रिकेट की प्रैक्टिस करते रहे. मेरठ में कोच संजय रस्तोगी ने उनकी काफी मदद की.

“पिता की लगन और अपनी कोच की मेहनत की वजह से मैं 2018 में उप्र रणजी क्रिकेट टीम में चुना गया. मेरा सपना है कि तेंदुलकर सर से मिलूं और उनसे क्रिकेट के टिप्स लूं . एक दिन टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनूं.”

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और प्रवीण कुमार जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के कोच रहे रस्तोगी ने कहा ,‘ इसका खेल ऐसा है कि यह भारतीय सीनियर टीम में जरूर शामिल होगा. घरेलू टूर्नामेंटों में इसका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा और यह मेहनत से पीछे नहीं हटता.’’