रियो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट भारतीय महिला शटलर पीवी सिंधू का कहना है कि कई टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचकर उनके हार जाने से लोग उन्हें ‘फाइनल फोबिया’ से ग्रसित कहने लगे थे.  ऐसे में इस ताने को सुनकर वह परेशान हो चुकी थीं और वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने को बेकरार थीं. Also Read - ऑल इंग्लैंड चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में हारकर PV Sindhu बाहर

सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक जीता था.  उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि मुझे ‘फाइनल फोबिया’ है तो बुरा लगता था.  बकौल सिंधू, ‘ विश्व चैंपियनशिप (पिछले वर्ष) में यह मेरा तीसरा फाइनल था.  मैंने दो कांस्य भी जीते.  मुझे लगा कि मुझे किसी भी कीमत पर खिताब जीतना है.  मैं खिताब जीतने के लिए बेताब थी.  मैं नहीं चाहती थी कि लोग कहें कि वह फिर से फाइनल में हार गई. ’ Also Read - Swiss Open 2021: स्विस ओपन के फाइनल में एकतरफा मुकाबले में मारिन से हारीं विश्व चैम्पियन पीवी सिंधु

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सिंधू ने भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना और जेमिमा रोड्रिग्स के साथ ‘डबल ट्रबल’ कार्यक्रम में कहा, ‘मैंने सोचा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं 100 फीसदी दूंगी.  मुझे यह खिताब जीतना होगा.  कई बार लोग मुझे ‘सिल्वर सिंधू’ कहते थे.  कभी-कभी ये बातें मेरे दिमाग में आती हैं. ’

सिंधू ने फाइनल में जापान की नोजुमी ओकुहारा को एकतरफा मुकाबले में 21-7, 21-7 से हराया था.  फाइनल शुरू होने की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘अगर हम यह कहें कि चीजें ठीक है और हम एकाग्र हैं तो हम पर दबाव होता है.  मैंने सोचा कि पूरा ध्यान अपने खेल पर दूंगी.  मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और फाइनल जीती.’

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सिंधू ने हाल में कहा था कि वह कोविड-19 महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक के एक साल तक के लिए स्थगित होने की खबर सुनने के लिए मानसिक रूप से तैयार थीं.