नई दिल्ली : केन्द्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) ने हॉकी इंडिया के पूर्व अध्यक्ष राजिंदर सिंह को सुनवाई के लिए कागजात नहीं मुहैया करने पर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि ‘‘ सांविधिक कार्य में बाधा उत्पन्न करने ’’ के लिए उन पर अधिकतम जुर्माना क्यों ना लगाया जाए. सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत उस अधिकारी पर जुर्माने का प्रावधान है जो केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के पद पर होता है. Also Read - Chaitra Navratri 2020 8th Day: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी आज, लॉकडाउन में ऐसे करें कन्या पूजन, शुभ मुहूर्त

भाजपा सांसद कीर्ति आजाद के मामले की सुनावाई करते हुए केन्द्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने हॉकी इंडिया लीग के जुड़े प्रायोजन राशि, प्रायोजन पाने के लिए दिये गये कमीशन, वकीलों को किये गये भुगतान के अलावा कुछ और जानकारियों की मांगी थी. Also Read - Aaj Ka Panchang 1 April 2020: चैत्र नवरात्रि अष्टमी, देखें पंचांग, शुभ-अशुभ समय, राहुकाल

आजाद ने हॉकी इंडिया से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद सूचना आयुक्त का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवायी के दौरान हॉकी इंडिया ने ऐसे कागजात पेश किये जिससे ये साबित करने की कोशिश की गयी कि आजाद भाजपा के एक सांसद को ‘कटघरे में खड़ा’ करना चाहते है. सूचना आयुक्त ने हॉकी इंडिया की इस दलील को खारिज कर दिया. Also Read - कोरोना वायरस के 'इलाज और टीके' के लिए पीएम मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से बात

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हॉकी इंडिया के वकील ने आयुक्त के समक्ष जो सीलबंद लिफाफे में कागजात पेश किये. इन कागजातों में प्रायोजन से जुड़ी जानकारी को काले रंग से रंग दिया गया. आचार्यलु ने कहा, ‘‘ इससे जाहिर होता है कि हॉकी इंडिया यह नहीं चाहता की आयुक्त मूल दस्तावेज और फोटो कापी के जरिये दस्तावेज देखे.’’

श्रीधर ने कहा, ‘‘जब ऐसी जानकारियां छुपायी गयी है तो लिफाफे को सीलबंद क्यों किया गया था? आयुक्त से इस तरह से जानकारी छुपाना नियमों के खिलाफ है जो कि उनके प्रतिनिधि के द्वारा कानून का गंभीर उल्लंघन है.’’

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उन्होंने कहा कि आमतौर पर वह सीपीआईओ रंजीत गिल को कारण बताओ नोटिस देते लेकिन हॉकी इंडिया इतनी बड़ी और ताकतवार संस्था है कि उसके छोटे अधिकारी स्वतंत्र तौर काम नहीं कर सकते होंगे. आचार्यलु ने कहा, ‘‘आयुक्त 28 अगस्त को 2018 को इसके अध्यक्ष रहे राजिंदर सिंह (वह अब महासचिव है) को इसके लिए जिम्मेदार मानता है और निर्देश देता है कि वह कारण बताये कि उन पर इसके लिए अधिकतम जुर्माना ना लगाया जाए.’’