भारतीय महिला हॉकी टीम हाल में न्यूजीलैंड दौरे से लौटी है. रानी रामपाल की अगुआई में टीम का प्रदर्शन मिला-जुला रहा था. अपनी कप्तानी में भारत को तीसरी बार ओलंपिक में पहुंचाने वाली रानी को पिछले दिनों ‘वर्ल्ड गेम एथलीट ऑफ द ईयर’ चुना गया था. रानी रामपाल की इच्छा है कि अगर उनके जीवन पर कोई बायोपिक बने तो उसमें बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण उनका रोल करें.

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खिलाड़ियों के बायोपिक के इस दौर में रानी का जीवन एक सुपरहिट बालीवुड फिल्म की पटकथा हो सकता है. इस बारे में उन्होंने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा,‘मेरे जीवन पर बायोपिक बने तो दीपिका पादुकोण मेरा रोल करें, क्योंकि वह खेलों से प्यार करती हैं. खेलों से प्रेम उन्हें परिवार से विरासत में मिला है और दीपिका में मुझे एक खिलाड़ी के गुण नजर आते हैं.’

लड़कियों की रोल मॉडल बन गई हैं रानी रामपाल

रूढिवादी समाज और गरीबी से लड़कर इस मुकाम तक पहुंची रानी अपने संघर्षों और अप्रतिम सफलता के दम पर लड़कियों की रोल मॉडल बन गई है. उन्हें हाल ही में ‘वर्ल्ड गेम एथलीट ऑफ द ईयर’ चुना गया और यह पुरस्कार पाने वाली वह पहली भारतीय और दुनिया की इकलौती हॉकी खिलाड़ी हैं.

महज सात साल की उम्र से हॉकी खेल रही रानी ने कहा, ‘यह सफर अच्छा और संघर्ष से भरपूर रहा. यह पुरस्कार एक साल की मेहनत का नतीजा नहीं बल्कि 18-19 साल की मेहनत है. मैं कर्म में विश्वास करती हूं. यह सिर्फ किस्मत से नहीं मिला है.’

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उन्होंने कहा ,‘आज से 20 साल पहले हरियाणा जैसे राज्य में लड़कियों को इतनी आजादी नहीं थी, लेकिन अब तो हालात बिल्कुल बदल गए हैं. बहुत अच्छा लगता है कि मुझे देखकर कइयों ने अपनी लड़कियों को खेलने भेजा. जहां पहले घर में लड़की होना अभिशाप माना जाता था, वहां यह बड़ा बदलाव है और उसका हिस्सा होना अच्छा लगता है.

‘अच्छा लगता है जब आपके प्रयासों को सराहा जाता है’

पुरस्कारों के बारे में उन्होंने कहा, ‘अच्छा लगता है जब आपके प्रयासों को सराहा जाता है. इससे देश के लिए और अच्छा खेलने की प्रेरणा मिलती है. ऐसे पुरस्कारों से महिला हॉकी को पहचान मिलती है, जो सबसे खास है. मैं हमेशा से टीम के लिए शत-प्रतिशत देती आई हूं और आगे भी यह जारी रहेगा.’

उम्र के इस पड़ाव पर जहां शादी को लेकर दबाव बनना शुरू हो जाता है, रानी की नजरें सिर्फ टोक्यो ओलंपिक में पदक पर लगी हैं.

उन्होंने कहा, ‘शादी का दबाव नहीं है, ओलंपिक का है और पदक जीतना ही लक्ष्य है. कुछ और सोच ही नहीं रही. टोक्यो में भारतीय हॉकी को वह पदक दिलाना है, जिसका इंतजार पिछले कई दशक से हम कर रहे हैं. मुझे यकीन है कि मेरी टीम ऐसा कर सकती है.’

इस आत्मविश्वास की वजह पूछने पर उन्होंने कहा,‘हमने ऊंची रैंकिंग वाली टीम से खेला और प्रदर्शन अच्छा रहा. भारतीय टीम संयोजन अच्छा है. फिटनेस और कौशल दोनों है, जबकि तीन चार साल पहले ऐसा नहीं था.’

रानी के घर की आर्थिक स्थिति किसी जमाने में इतनी खराब थी कि उनके पास हॉकी किट खरीदने और कोचिंग के पैसे नहीं थे. यही नहीं समाज ने उसके खेलों में आने का भी कड़ा विरोध किया था, लेकिन अब उसी समाज की वह रोल मॉडल बन गई हैं.