बीसीसीआई ने पूर्व ऑलराउंडर रवि शास्त्री को 2019 के वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट टीम का नया कोच नियुक्त कर दिया है. शास्त्री की नियुक्ति के साथ ही कोच पद को लेकर पिछले कई दिनों से जारी अटकलों का बाजार थम गया. रवि शास्त्री इससे पहले भी 2014 से 2016 तक टीम इंडिया के डायरेक्टर पर काम कर चुके हैं. रवि शास्त्री को टीम इंडिया के मुख्य कोच पद पर नियुक्त किए जाने के साथ ही जहीर खान को गेंदबाजी कोच और अंडर-19 और भारत-ए के कोच राहुल द्रविड़ को विदेश दौरे के लिए टीम इंडिया का बल्लेबाजी कोच बनाया गया है. आइए जानें कौन हैं टीम इंडिया के नए कोच रवि शास्त्री. Also Read - IPL 2021: MS Dhoni और Rishabh Pant की टक्कर, कोच रवि शास्त्री ने कही यह बात

मुंबई के लिए किया प्रथम श्रेणी करियर का आगाजः
रवि शास्त्री का जन्म 27 मई 1962 को मुंबई में हुआ था. दाएं हाथ से बल्लेबाजी और बाएं हाथ से ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज करने वाले रवि शास्त्री ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना डेब्यू मुंबई के लिए 1979 में महज 17 साल 292 दिन की उम्र में किया था. उसके तुरंत बाद उनका चयन 1980 में पाकिस्तान के दौरे पर जाने वाली अंडर-19 टीम में हो गया. लेकिन वह दौरा रद्द हो गया. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शास्त्री का सबसे यादगार प्रदर्शन मुंबई के लिए 1979-80 में दिल्ली के खिलाफ रणजी फाइनल में 61 रन देकर 6 विकेट लेना था लेकिन मुंबई वह मैच हार गई थी. Also Read - IND-ENG Series के दौरान रवि शास्‍त्री ने Virat-Rohit में कराई सुलाह, मैदान पर भी आई नजर: सूत्र

टीम इंडिया के लिए ऑलराउंडर के तौर पर खेले शास्त्रीः
शास्त्री को उनके ‘चपाती शॉट’ के लिए जाना जाता है. उन्होंने अपना करियर लेफ्ट ऑर्म स्पिनर के तौर पर किया था लेकिन धीरे-धीरे वह ऑलराउंडर बन गए. वह स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक बैंटिंग करते थे लेकिन अपनी 6 फीट 3 इंच की हाइट की वजह से तेज गेंदबाजों के खिलाफ शास्त्री के पास सीमित शॉट्स थे. लेकिन फिर भी अपनी मेहनत के दम पर वह भारत के सबसे कामयाब ऑलराउंडरों में से एक बनने में कामयाब रहे. (टीम इंडिया के नए हेड कोच बने रवि शास्त्री, दो साल के लिए जहीर खान को बॉलिंग कोच की जिम्मेदारी) Also Read - India vs England: भारतीय टीम की जीत से गदगद हुए कोच Ravi Shastri, ट्विटर पर लिखी दिल छू लेने वाली बात

शास्त्री ने इंटरनेशल क्रिकेट में अपना डेब्यू 1981 में न्यूजीलैंड दौरे पर किया. उन्होंने अपना पहला टेस्ट वेलिंगटन में फरवरी 1981 में न्यूजीलैंड के खिलाफ किया. अपने पहले ही मैच में शास्त्री ने 3 और 19 के स्कोर बनाने के अलावा 3-3 विकेट सहित कुल 6 विकेट झटके. उस टेस्ट सीरीज के तीसरे टेस्ट में शास्त्री ने 7 विकेट झटके और मैन ऑफ मैच रहे और पूरी सीरीज में उन्होंने सबसे ज्यादा 15 विकेट झटके.

शास्त्री ने वनडे क्रिकेट में अपना डेब्यू नवंबर 1981 में अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ किया था. अपने पहले मैच में शास्त्री ने 28 गेंदों में 19 रन बनाए लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका.

शास्त्री के करियर के सबसे यादगार प्रदर्शनः
शास्त्री ने अपने करियर का सबसे यादगार प्रदर्शन 1985 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया की खिताबी जीत में किया और वह 182 रन बनाने के साथ ही 8 विकेट लेकर मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे.

इससे एक साल पहले 1984 में शास्त्री ने रणजी ट्रॉफी फाइनल में दिल्ली के खिलाफ 91 रन देकर 8 विकेट लेते हुए मुंबई को 30वीं बार रणजी चैंपियन बनाया था.

शास्त्री ने 1987 में अपनी कप्तानी में भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ मद्रास टेस्ट में जीत दिलाई थी, शास्त्री ने अपने करियर में इस एकमात्र टेस्ट में भारत की कप्तानी की.

शास्त्री की अक्सर उनकी धीमी बैटिंग के लिए आलोचना होती थी और उन्हें आलचकों ने स्वार्थी क्रिकेटर तक करार दिया. लेकिन खेल के छोटे फॉर्मेट में एक ऑलराउंडर के तौर पर वह भारतीय टीम के लिए खुद को उपयोगी साबित करने में कामयाब रहे. हालांकि घुटने की चोट की वजह से उनका करियर समय से पहले ही खत्म हो गया. उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट और वनडे 1992 के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर खेला, तब वह 30 वर्ष के ही थे.

शास्त्री ने अपने करियर में 80 टेस्ट मैचों में 35.79 की औसत के साथ 3830 रन बनाए जिनमें 11 शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं. साथ ही उन्होंने 151 टेस्ट विकेट भी झटके. उन्होंने 150 वनडे में 29.04 की औसत से 3108 रन बनाए जिनमें 4 शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं. वनडे में उन्होंने 129 विकेट लिए.

रिटायरमेंट के बाद का करियरः

रिटायरमेंट के बाद रवि शास्त्री ने कॉमेंटेटर के रूप में दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई. बहुत कम लोगों को पता होगा कि 2007 में ग्रेग चैपल द्वारा टीम इंडिया के कोच पद से इस्तीफे के बाद शास्त्री को अस्थाई कोच बनाया गया था.

2014 में उन्हें टीम इंडिया का डायरेक्टर नियुक्त किया गया था और वह इस पद 2016 के टी20 वर्ल्ड कप तक रहे. शास्त्री ने 2016 में टीम इंडिया के कोच पद के लिए आवेदन किया था लेकिन आखिर में उन्हें इस रेस में अनिल कुंबले से मात मिली.