अगर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के एथिक्स अधिकारी डी.के. जैन ने कपिल देव, अंशुमान गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) को हितो के टकराव का दोषी पाते हैं तो टीम इंडिया (Team India) के प्रमुख कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) का (टी20 विश्व कप 2021 तक का) दूसरा कार्यकाल खतरे में आ जाएगा। Also Read - शुबमन गिल ने किया खुलासा- करियर की शुरुआत में हुई इस घटना के बाद खत्म हो गया बाउंसर का डर

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बोर्ड ने इस तीन सदस्यीय समिति का गठन भारतीय क्रिकेट टीम के नए कोच की नियुक्ति के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया था। ऐसे में अगर समिति के सदस्यों को हितो के टकराव मामले में दोषी पाया जाता है तो शास्त्री की नियुक्ति की प्रक्रिया फिर से दोहरानी पड़ जाएगी। Also Read - कप्तान अजिंक्य रहाणे के पूछने पर गाबा टेस्ट में चोट के साथ गेंदबाजी को तैयार थे नवदीप सैनी

आईएएनएस को दिए बयान में बोर्ड से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “मुख्य कोच पद पर शास्त्री की नियुक्ति स्पष्ट रूप से दोबारा करनी होगी, अगर उन्हें नियुक्त करने वाले समिति सदस्यों में हितों का टकराव पाया जाता है तो। फिर एक नई समिति का गठन किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को फिर से दोहराया जाएगा और नए पंजीकृत बीसीसीआई संविधान को ध्यान में रखते हुए ये सब किया जाना चाहिए क्योंकि संविधान अब स्पष्ट रूप से कहता है कि केवल एक सीएसी भारतीय टीम के मुख्य कोच को नियुक्त कर सकता है।”

हितों का टकराव’ नोटिस के बाद पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी ने सीएसी व आईसीए से इस्तीफा दिया

अधिकारी ने आगे कहा, “किसी को ये देखने की जरूरत है कि रमन मामले में जैन का फैसला क्या है उस मामले में भी, इसी तिकड़ी ने उन्हें कोच के पद पर नियुक्त किया था, क्योंकि दो सदस्यीय सीओए की राय बंटी हुई थी। विनोद राय इन तीन सदस्यों के कोच की नियुक्ति करने के पक्ष में थे और डायना इडुल्जी ने साफ किया था कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों के हिसाब से तैयार बीसीसीआई के संविधान में एड-हॉक समिति की कोई जगह नहीं है।”

जैन ने समिति के तीनों सदस्यों को 10 अक्टूबर तक हितों के टकराव मामले में जवाब देने का समय दिया है। बता दें कि समिति की सदस्य और पूर्व भारतीय कप्तान शांता रंगास्वामी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।