कोरोनावायरस के इस मुश्किल वक्‍त में क्रिकेट को नई परिस्थितियों में फिर शुरू करने को लेकर विचार चल रहा है. ऐसे में आईसीसी भी गेंद पर लार का इस्‍तेमाल नहीं करने का सुझाव दे चुकी है ताकि संक्रमण से बचा जा सके. आने वाले समय में गेंद को चमकाने के लिए खिलाड़ी लार की जगह किसी और चीज का इस्‍तेमाल कर सकते हैं. रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि गेंद पर लार लगाना गेंदबाजों की आदत का हिस्सा है और अगर क्रिकेट फिर से शुरू होगा तो इस आदत से छुटकारा पाने के लिये अभ्यास की जरूरत पड़ेगी. Also Read - दिल्ली में कोरोना का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में 1163 नए मामले सामने आए

दिल्ली कैपिटल्स के इंस्टाग्राम लाइव चैट पर रविचंद्रन अश्‍विन ने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि मैं अब कब मैदान पर उतरूंगा. लार लगाना मेरे लिये स्वाभाविक है. इसके लिये (लार लगाने से बचना) थोड़ा अभ्यास की जरूरत पड़ेगी. लेकिन मुझे लगता है कि अगर हमें साथ में रहना होगा, जो कि मानव जाति के डीएनए में है, तो हमें कोशिश करनी होगी और इसे अपनाना होगा. ’’ Also Read - विराट कोहली ने कहा- मेरे कप्तान बनने के पीछे महेंद्र सिंह धोनी का बड़ा हाथ

कैरम बॉल के बारे में अश्विन ने कहा कि उन्हें अपने अस्त्रों में इस गेंद को जोड़ने में चार साल का समय लगा. ‘‘यह इन वैरीएशन के साथ लगातार काम करने और इससे निराश होने से जुड़ा है. कल्पना कीजिए कि आप अपनी बीच की उंगली से कैरम खेल रहे हों और उतने वजन की क्रिकेट गेंद को धक्का देने की कोशिश कर रहे हैं जिसे कम नहीं किया जा सकता है. आप इसे पूरे जोर से धकेलकर स्पिन हासिल करने की कोशिश करते हो.’’ Also Read - जानवरों से इंसानों में कैसे पहुंचा कोरोना वायरस, आखिरकार रिसर्च में हुआ खुलासा

अश्विन ने कहा, ‘‘यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. आपकी उंगली, आपके शरीर को उसे समझना होता है. मैंने जब इस कैरम बॉल का अभ्यास किया तो मैं हर दिन इसे बेहतर करने की उम्मीद करता था लेकिन प्रत्येक दिन कई सौ गेंदें करने के बाद मैं निराशा के साथ घर लौटता था कि मैंने जो लक्ष्य तय किया था उसे हासिल नहीं कर पाया.’’