वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में रवींद्र जडेजा को तीनों मैचों में रिस्ट स्पिनर युजवेंद्र चहल पर प्राथमिकता दी गई, हालांकि कई फैंस को टीम मैनेजमेंट का ये फैसला रास नहीं आया। लेकिन कटक में वेस्टइंडीज के खिलाफ निर्णायक वनडे मैच में कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर और फिर उनके आउट होने के बाद भी जडेजा क्रीज पर टिके रहे और 31 गेंदो पर 39 रन की पारी खेलकर भारत को मैच के साथ सीरीज भी जिताई।

जडेजा की इस पारी ने ना केवल अतिरिक्त बल्लेबाज की अहमियत को साबित किया बल्कि उनके आलोचकों को करारा जवाब भी दिया। हालांकि सौराष्ट्र के इस ऑलराउंडर ने साफ कहा कि वो किसी और नहीं बल्कि खुद को साबित करने के लिए खेलते हैं। जडेजा ने कहा, ‘‘मुझे खुद को साबित करना था कि मैं अभी भी सीमित ओवरों का क्रिकेट खेल सकता हूं। मुझे दुनिया में किसी को कुछ साबित नहीं करना था।’’

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कटक वनडे की पारी के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ये काफी अहम पारी थी क्योंकि ये निर्णायक मैच था। विकेट बल्लेबाजी के लिए उम्दा था। हमें बस गेंद को भांपकर खेलना था। मैने इस साल ज्यादा वनडे क्रिकेट नहीं खेला। लेकिन जब भी मौका मिला गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।’’

भारत को वनडे सीरीज जिताने में जडेजा के साथ शार्दुल ठाकुर की छह गेंद में 17 रन की नाबाद पारी भी बेहद अहम थी। इस साझेदारी पर उन्होंने कहा, ‘‘आखिरी गेंद तक खेलना अहम था। हमें पता था कि हम ही जीतेंगे।”