ब्राजीलीयाई महानगर रियो डी जेनेरियो में शुक्रवार से शुरू हो रहे ओलम्पिक खेलों-2016 में भारत ने इस बार अपना सबसे बड़ा दल भेजा है और करोड़ों देशवासियों को उम्मीद है कि यह दल इस बार इतिहास रचते हुए पहले से ज्याद पदक लाएगा। अनुभव, युवा जोश और कई नए खिलाड़ियों से सजे भारतीय ओलम्पिक दल को घर पर बैठे करोड़ों लोगों की दुआएं हासिल हैं और इस दल की भी कोशिश देशवासियों के हिस्से में खुशी डालने की होगी। Also Read - Deepa Malik first Indian woman to win Paralympics medal | रियो पैरालम्पिक (गोलाफेंक): रजत जीत दीपा मलिक ने रचा इतिहास

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भारत इस बार सबसे ज्यादा खेलों में हिस्सा ले भी रहा है। देश का लक्ष्य लंदन ओलम्पिक-2012 में मिले छह पदकों की संख्या को बढ़ाना है और इसे दहाई के अंकों में पहुंचाना है। रियो ओलम्पिक पांच अगस्त से 21 अगस्त से बीच खेले जाएंगे। देश को पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद निशानेबाज अभिनव बिंद्रा से है। बीजिंग ओलम्पिक-2008 में भारत के हिस्से में एकल स्पर्धाओं का पहला स्वर्ण पदक डालने वाले बिंद्रा से इस बार भी पदक की उम्मीद है। उन्होंने 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था।

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उनके अलावा लंदन ओलम्पिक-2012 में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाले एक अन्य निशानेबाज गगन नारंग से भी भारत को पदक की उम्मीद है। नारंग भी इस बार अपने खाते में स्वर्ण पदक डालने का प्रयास करेंगे। इन दोनों के अलावा निशानेबाजी में जीतू राय एक ऐसा नाम है जिनसे पदक की उम्मीद की जा सकती है। वह पुरुषों की 50 मीटर और 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में हिस्सा ले रहे हैं।

कुश्ती एक और ऐसा खेल है जहां भारत को पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद है। हाल के वर्षो में भारत कुश्ती में मजबूत प्रतिद्वंद्वी बन कर उभरा है। लंदन ओलम्पिक-2012 में 60 किलोग्राम भारवर्ग में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त इस बार 65 किलोग्राम भारवर्ग में अपनी सफलता दोहराने की कोशिश करेंगे।

दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार से कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद नरसिंह पंचम यादव 74 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। नरसिंह भी अपनी श्रेणी में पदक के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। भारत को इस श्रेणी में ओलम्पिक कोटा दिलाने वाले नरसिंह हाल ही में डोपिंग के आरोपों में फंसे थे, लेकिन राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने उन्हें आरोपमुक्त करते हुए उनके रियो जाने के दरवाजे खोल दिए हैं। हालांकि विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) से उन्हें अभी हरी झंडी मिलना बाकी है।

बैडमिंटन में भारत को अपनी स्टार महिला खिलाड़ी सायना नेहवाल से काफी उम्मीदें है। लंदन ओलम्पिक-2012 में महिला एकल में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली यह विश्व की पांचवीं वरीय खिलाड़ी पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही है।

निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन के अलावा भारत को टेनिस में पदक की उम्मीद है। इस खेल में मिश्रित युगल जोड़ी सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना से पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद है। वहीं पुरुष युगल जोड़ी लिएंडर पेस और बोपन्ना भी भारत के हिस्से में पदक डालने की भरपूर कोशिश करेंगे। अटलांटा ओलम्पिक-1996 में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाले पेस का यह आखिरी ओलम्पिक हो सकता है इसलिए उनकी कोशिश पदक अपने नाम करने की होगी।

पिछले कुछ समय से भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने शानदार खेल से सभी को प्रभावित किया है। हाल ही में चैम्पियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीत इतिहास रचने वाली इस टीम से भारत को पदक जीतने की उम्मीद होगी।

1980 के बाद भारत हॉकी में ओलम्पिक में पदक हासिल नहीं कर पाया है। नवनियुक्त कप्तान पी. आर. श्रीजेश के नेतृत्व में टीम इस सूखो को खत्म करने की भरपूर कोशिश करेगी।

वहीं, 36 साल बाद ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम भी इस समय अच्छे फॉर्म में है। टीम पदक जीत एक बार फिर इतिहास रचने की कोशिश करेगी।

ओलम्पिक खेलों में जिमनास्टिक में क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी दीपा कर्माकर आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। वह खेलों के महाकुंभ में अपने खेल से भारत की उम्मीदों पर खरा उतरने और पदक लाने की भरपूर कोशिश करेंगी।

एथलेटिक्स में भारत 4 गुणा 400 मीटर स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करना चाहेगा। मुहम्मद कुन्हू, मुहम्मद अनस याहिया, धरूण अय्यासामी और राजीव आरोकिआ ने हाल ही में 3:02.17 रिकार्ड समय के साथ ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया था। यह ओलम्पिक में भारत की पुरुषों की तीसरी रिले टीम है। इससे पहले भारत ने सिडनी ओलम्पिक-2000 और टोक्यो ओलम्पिक-1964 में अपनी पुरुष रिले टीम भेजी थी।

अनस 400 मीटर स्पर्धा में भी हिस्सा लेंगे।

महिलाओं की 800 मीटर स्पर्धा में टिंटू लुका से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

ओ. पी. जैशा मैराथन में हिस्सा लेंगी, हालांकि यहां उनका अफ्रीकी खिलाड़ियों से पार पाना मुश्किल होगा। सुधा सिंह भारत की झोली में पदक डालने की कोशिश करेंगी लेकिन उनका रास्ता भी आसान नहीं होगा।

ओलम्पिक से पहले हालांकि भारत के दो खिलाड़ी डोपिंग के चलते ओलम्पिक से बाहर हो चुके हैं।

गोला फेंक खिलाड़ी इंदरजीत सिंह ने हालांकि डोपिंग में फंसने के बाद अपने खिलाफ साजिश करने का आरोप लगाया है। उनके बी नमूने के परिणाम का अभी इंतजार है। वहीं, पुरुषों की 200 मीटर स्पर्धा में 36 साल बाद क्वालीफाई करने वाले घर्मवीर सिंह भी डोपिंग में फंसने के कारण रियो की उड़ान नहीं भर पाए हैं।