रियो ओलम्पिक में जिम्नास्टिक पुरुष स्पर्धाएँ जारी थी। प्रादुनोवा वॉल्ट शुरू हुआ। फ्रांस के एक जिम्नास्ट ने दौड़ लगाना शुरू किया। स्प्रिंग से उछलकर हवा में दो कुलाँचे और फिर जमीन पर पैर के बल लैंडिंग। हवा में दो कुलाँचे तक तो सबकुछ ठीक था लेकिन लैंडिंग करते वक्त तड़ाक की एक तेज़ आवाज आई। जिम्नास्ट ने एक हाथ से अपना टूटा पैर और दूसरे से अपना सिर पकड़कर वहीं पड़ा रहा। पैर दो खंडों में हो गया था। वहाँ मौजूद दर्शकों के साथ निर्णायक भी विह्वल हो गए। जो लोग टीवी पर यह मैच देख रहे थे उनकी आँखों के कोर भी नम हो गए। Also Read - Happy Birthday PV Sindhu: विरासत में मिला खेल, रोजाना 56 किलोमीटर की दूरी तय कर ट्रेनिंग अकादमी पहुंचती थीं पीवी सिंधू

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रियो ओलम्पिक में भारत की एक मात्र महिला जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने क्वालीफाई करके देश का गौरव बढ़ाया। जिम्नास्टिक प्रतिस्पर्धा में वो बड़ी सफाई प्रादुनोवा वॉल्ट को करती हैं। प्रत्येक जंप के साथ उनकी जान दाँव पर लगी होती है। लेकिन देश के लिए उनका जज्बा काबिल-ए- तारीफ है। ऐसे में कुछ लोग कहते हैं कि खिलाड़ी वहाँ सिर्फ सेल्फी लेने और घूमने जाते हैं तो किसी भी खेलप्रेमी को गुस्सा आ सकता है।

दीपा करमाकर त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य की रहने वाली हैं। प्रोदुनोवा जिम्नास्टिक का सबसे कठिन वाल्ट माना जाता है। इसे अभी तक दुनिया की सिर्फ 5 महिलाओं ने किया है जिसमें से दीपा एक हैं। उन्होंने कितने संघर्षों से तैयारियाँ की हैं और अपनी एक जगह बनाई है वो बड़ी प्रेरणादायक है। इस वीडियो में देखिए भारतीय जिम्नास्ट दीपा कर्माकर के संघर्ष की कहानी…