भारतीय टेस्ट टीम के सीनियर विकेटकीपर माने जाने वाले ऋद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रिषभ पंत (Rishabh Pant) की साहसिक पारी के बाद उनके लिए टीम के दरवाजे बंद हो जाएंगे। वो अपना सर्वश्रेष्ठ करना जारी रखेंगे और चयन की माथापच्ची टीम मैनेजमेंट पर छोड़ देना चाहते हैं। Also Read - ICC Test Team Rankings: न्यूजीलैंड को पछाड़ फिर आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर वन बनी टीम इंडिया, इंग्लैंड को रौंदने का मिला तोहफा

ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज जीतने के बाद भारत लौटे साहा ने पीटीआई-भाषा को दिए विशेष इंटरव्यू में कहा, ‘‘आप पंत से पूछ सकते हैं, हमारा रिश्ता अच्छा है और हम दोनों प्लेइंग 11 में जगह बनाने वालों की मदद करते हैं। निजी तौर पर हमारे बीच कोई मनमुटाव नहीं है। मैं इसे नंबर एक और दो के तौर पर नहीं देखता। जो अच्छा करेगा टीम में उसे मौका मिलेगा। मैं अपना काम करता रहूंगा। चयन मेरे हाथ में नहीं है, ये मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।’’ Also Read - शर्मनाक हार के बाद बोले Joe Root, 'पहला मैच तो ठीक था, लेकिन बाकी में हम Team India की बराबरी नहीं कर पाए'

साहा ने गाबा में मैच के पांचवें दिन नाबाद 89 रन की पारी खेलने वाले पंत की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘कोई भी पहली क्लास में बीजगणित नहीं सीखता। आप हमेशा एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पंत अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहा है और निश्चित रूप से सुधार (विकेटकीपिंग) करेगा। उसने हमेशा परिपक्वता दिखाई है और खुद को साबित किया है। लंबे समय के लिए ये भारतीय टीम के लिए अच्छा है। वनडे और टी20 फॉर्मेट से बाहर होने के बाद उसने जो जज्बा दिखाया वो वास्तव में असाधारण है।’’ Also Read - IND vs ENG: भारत को जीत दिलाकर बोले, Rishabh Pant- जरूरत के वक्त प्रदर्शन करने से बेहतर कुछ नहीं

ब्रिसबेन टेस्ट के बाद पंत की तुलना दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी से की जाने लगी है लेकिन साहा ने कहा, ‘‘धोनी, धोनी ही रहेंगे और हर किसी की अपनी पहचान होती है।’’

साहा एडीलेड में खेले गए डे-नाइट टेस्ट की दोनों पारियों में महज नौ और चार ही बना सके थे। इस दौरान भारतीय टीम दूसरी पारी में महज 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी और इसके बाद साहा को बाकी के तीन मैचों में मौका नहीं मिला। इस पर उन्होंने कहा, ‘‘ कोई भी बुरे दौर से गुजर सकता है। एक पेशेवर खिलाड़ी हमेशा अच्छे और खराब प्रदर्शन को स्वीकार करता है, चाहे वो फॉर्म के साथ हो या फिर आलोचना के साथ ।’’

36 साल के विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा, ‘‘मैं रन बनाने में असफल रहा इसलिए पंत को मौका मिला। ये काफी सरल है। मैंने हमेशा अपने कौशल में सुधार करने पर ध्यान दिया है और अपने करियर के बारे में कभी नहीं सोचा। जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब से मेरी सोच ऐसी है। अब भी मेरा वही दृष्टिकोण है।’’

साहा ने कहा कि एडीलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने और कई खिलाड़ियों के अनुभवहीन होने के बाद यह श्रृंखला जीतना ‘विश्व कप जीतने से कम नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं खेल नहीं रहा था (तीन मैचों में), फिर भी मैं हर पल का लुत्फ उठा रहा था। हमें 11 खिलाड़ियों को चुनने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में ये शानदार उपलब्धि है। जाहिर है यह हमारी सबसे बड़ी श्रृंखला जीत है।

विराट कोहली की गैरमौजूदगी में टीम की कमान संभालने वाले अजिंक्य रहाणे के बारे में साहा ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रहने से उन्हें सफलता मिली। उन्होंने कहा, ‘‘वो शांति से अपना काम करते थे। विराट की तरह वो भी खिलाड़ियों पर भरोसा करते हैं। विराट के उलट वो ज्यादा जोश नहीं दिखाते। रहाणे को खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई करना आता है। यही उनकी सफलता का राज है।’’