विजयनगरम: रोहित शर्मा गुरुवार से यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू होने वाले तीन दिवसीय अभ्यास मैच में बोर्ड अध्यक्ष एकादश की अगुआई करेंगे जिसमें वह सलामी बल्लेबाज के तौर पर अपने ट्रायल के अंतिम प्रयास में खुद को साबित करना चाहेंगे. राष्ट्रीय चयन समिति और टीम प्रबंधन ने रोहित के स्ट्रोक्स खेलने की काबिलितय को देखते हुए उन्हें सलामी बल्लेबाज के तौर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है और अगले पांच टेस्ट इस 32 साल के स्टाइलिश बल्लेबाज के लिए अहम साबित होंगे.

दूसरे सलामी बल्लेबाज के तौर पर उनके पास मयंक अग्रवाल होंगे और दोनों दो अक्टूबर से विशाखापत्तनम में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाना चाहेंगे. तीसरे अहम खिलाड़ी उमेश यादव होंगे जिन्हें चोटिल जसप्रीत बुमराह के स्थान पर टेस्ट टीम में शामिल किया गया है. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि गुरूवार को सभी का ध्यान रोहित पर लगा होगा. सफेद गेंद के प्रारूप में आधुनिक समय के महान खिलाड़ियों में से एक रोहित का 27 टेस्ट मैचों में औसत 39.62 का है जिसमें तीन शतक शामिल हैं.

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लाल गेंद के उप कप्तान अजिंक्य रहाणे और तेजी से आगे बढ़ रहे हनुमा विहारी ने वेस्टइंडीज में प्रभावशाली प्रदर्शन के बूते मध्य क्रम का अपना स्थान मजबूत किया है जिससे रोहित के लिए बचा हुआ एकमात्र विकल्प शीर्ष स्थान पर बल्लेबाजी करना था. तीन दिवसीय मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गेंदबाजी आक्रमण में कागिसो रबाडा, वर्नोन फिलेंडर और लुंगी एनगिडी शामिल हैं. विशाखापत्तनम में शुरूआती मैच से पहले यह अच्छा ‘ड्रेस रिहर्सल’ होगा. रोहित की लाल एस जी, ड्यूक या कूकाबुरा गेंद के खिलाफ तकनीक थोड़ी संदेह वाली रही है लेकिन वीरेंद्र सहवाग की अपार सफलता को ध्यान में रखते हुए विराट कोहली और रवि शास्त्री इस दांव को खेलने को तैयार हैं.

अगर यह कारगर रहता है तो इस कदम को ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो ए टीम में सलामी बल्लेबाजों के तौर पर शुभमन गिल, अभिमन्यु ईश्वरन और प्रियांक पांचाल मौजूद होंगे. लोकेश राहुल को नहीं भूलना चाहिए जो बड़ी पारी खेलना चाहेंगे ताकि अपनी जगह वापस ले सकें. वहीं पृथ्वी शॉ  भी डोपिंग प्रतिबंध और कड़े सबक के बाद वापसी के लिए  बेताब होंगे.

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उप महाद्वीप की नीची और धीमी पिचों पर रोहित अगर सफल रहते हैं तो भी इस बात की गारंटी नहीं है कि वह न्यूजीलैंड के मैदानों पर इसे दोहराने में सक्षम होंगे, जहां ट्रेंट बोल्ट उन्हें पस्त करने के लिये मौजूद होंगे. भारत के बेहतरीन वनडे सलामी बल्लेबाजों में से एक के लिए हालांकि सफर काफी मुश्किल भरा होगा क्योंकि अगले छह महीने खेल के इस पारंपरिक प्रारूप में उनके भाग्य का फैसला करेंगे.