भारत के खिलाफ 21 फरवरी को होने वाले पहले टेस्ट मैच के साथ क्रिकेट के लिए सभी फॉर्मेट में 100 मैच खेलने का विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले न्यूजीलैंड के बल्लेबाज रॉस टेलर (Ross Taylor) को एक समय पर अपने टेस्ट करियर के आगे बढ़ने पर भरोसा नहीं था। Also Read - विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए 2 जून को इंग्लैंड रवाना होगी टीम इंडिया; 10 दिन तक क्वारेंटीन में रहेंगे खिलाड़ी

पूर्व दिग्गजों स्टीफेन फ्लेमिंग (Stephen Fleming) और ब्रैंडन मैक्कुलम (Brendon Mccullum) को पछाड़कर टेलर न्यूजीलैंड के लिए सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं, लेकिन एक समय पर अपने टेस्ट करियर को लेकर अनिश्चित थे। Also Read - Tim Seifert भी कोरोना पॉजिटव, चेन्नई के हॉस्पिटल में चलेगा इलाज

टेलर ने कहा, “मुझे लगता है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मेरी पहली सीरीज के बाद मुझे नहीं लगा था कि मैं फिर कभी टेस्ट क्रिकेट सकूंगा। समय ने मेरा साथ दिया, 2005 में टी20 क्रिकेट आया और मैंने 206 में डेब्यू किया। इसलिए शायद सही समय की वजह से मैं यहां पहुंच सका लेकिन ऐसा करने (100 टेस्ट, वनडे टी20 खेलने) वाला पहला खिलाड़ी बनना अच्छा है और उम्मीद है कि समय के साथ दुनिया भर के और भी खिलाड़ी ऐसा कर पाएंगे।” Also Read - डेविड वार्नर को कप्तानी से हटाने के SRH के फैसले से हैंरान हुए पूर्व क्रिकेटर डेनियल विटोरी

भारत के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज के दौरान टेलर ने अपना 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। टेलर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शोएब मलिक और भारतीय स्टार रोहित शर्मा के बाद ऐसा करने वाले विश्व के तीसरे खिलाड़ी हैं।

IPL 2020: क्या नया लोगो विराट कोहली की कप्तानी वाली RCB फ्रेंचाइजी की किस्मत बदल पाएगा?

टेस्ट करियर को लेकर उनका विचार कब बदला इस बारे में टेलर ने कहा, “ये शायद यहां हुआ था। इसलिए मैंने पहली सीरीज दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलीष बांग्लादेश के खिलाफ दो मैचों की घरेलू सीरीज से ड्रॉप हुआ और फिर घर पर इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज खेलने का मौका मिला और मैंने पहले टेस्ट में शतक बनाया। वो शायद पहला मौका था जब मुझे विश्वास हुआ कि मैं इस स्तर पर खेल सकता हूं।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने पूरे करियर में इतना भाग्यशाली रहा कि तीसरे ही टेस्ट में शतक बना सका। और फिर वनडे करियर में भी मैं तीसरे मैच में शतक बनाने में कामयाब हुआ। करियर में शुरुआत में ये कीर्तिमान हासिल कर पाने से निश्चित तौर पर काफी मदद मिली और मुझे ये भरोसा हुआ कि मैं यहां रहने के काबिल हूं और मैं इस स्तर पर खेलने की काबिलियत रखता हूं।”