भारत और बांग्‍लादेश के बीच डे-नाइट टेस्‍ट मैच शुरू होने में अब 48 घंटे से भी कम वक्‍त बचा है। ज्‍यादा से ज्‍यादा दर्शकों को मैदान पर लाने के मकसद से आयोजित किए जा रहे इस डे-नाइट टेस्‍ट मैच को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। आईसीसी एलीट पेनल में शामिल भारत के एकमात्र अंपायर एस रवि वर्ष 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले डे-नाइट टेस्ट मैच में अंपायरिंग करने को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

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एस. रवि ने बताया कि मैच की टाइमिंग के चलते उन्‍हें अपने सोने की आदतों को बदलना पड़ा था। भारत और बांग्‍लादेश के बीच 12वां डे-नाइट टेस्‍ट मैच होने जा रहा है। पहला डे-नाइट टेस्‍ट चार साल पहले एडिलेड में गुलाबी गेंद से खेला गया था।

पहले टेस्ट में अंपायरिंग करने वाले रवि ने काफी तैयारी की थी। उन्‍होंने दो महीने पहले दुबई में आईसीसी की वर्कशॉप में भाग लिया और बाद में पर्थ में न्यूजीलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया एकादश के बीच दो दिवसीय प्रैक्टिस मैच में अंपायरिंग की थी।

न्‍यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरा रवि ने सूरत से प्रेस ट्रस्ट से बातचीत के दौरान कहा ,‘‘पिंक गेंद से टेस्ट में अंपायरिंग करना लगातार पांच वनडे मैचों में अंपायरिंग करने जैसा है। ऐसे में इसकी तैयारी भी कुछ उसी तरह की होनी चाहिये।’’

एस. रवि ने कहा ,‘‘जब मैं उस ऐतिहासिक मैच में अंपायरिंग कर रहा था तो देर से सोता था और देर से उठता था। वो मैच रात साढ़े दस बजे तक चलता था और होटल में आकर सोने में काफी देर हो जाती थी। उस दौरान मैंने देर से सोने की आदत डाली।’’

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‘‘किसी भी टेस्ट मैच से पहले नर्वसनेस होती ही है। मैं काफी उत्साहित था और माहौल का मजा ले रहा था। मैं भी नर्वस था लेकिन रोमांच भी उतना ही था।’’

ढ़लते सूरज के दौरा अंपायरिंग मुश्किल

एस. रवि ने बताया,‘‘जब सूरज ढलते का समय आता है तो उस वक्‍त बॉल को देखना मुश्किल होता है। बॉल को देखने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है । हमें ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है ।’’