भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले पहले डे-नाइट टेस्ट मैच को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। जहां एक तरफ राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) और हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) जैसे दिग्गजों ने इसे टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अहम लेकिन नाकाफी कोशिश बताया है, वहीं महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने सारा ध्यान नए फॉर्मेट पर ना देकर खेल की गुणवत्ता बरकरार रखने की बात कही।

तेंदुलकर ने प्रेस ट्रस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘सब कुछ दर्शकों को अधिक संख्या में मैदान में लाने और टेस्ट क्रिकेट को अधिक रोचक बनाने के लिए किया जा रहा है। ये अहम है लेकिन मेरा मानना है कि मैच के बाद आकलन किया जाना चाहिए। कितनी ओस थी और खेल के स्तर से समझौता तो नहीं किया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके दो पहलू हैं। पहला दर्शकों को मैदान पर लाना और साथ ही खेल की गुणवत्ता से समझौता नहीं करना। गेंद अगर गीली होने लगे और खेल पर उसका असर पड़े तो हमें देखना होगा कि हम क्या करना चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो बहुत बढ़िया है। लेकिन अगर ओस रहती है और अच्छा क्रिकेट देखने को नहीं मिलता तो इसका विश्लेषण जरूरी है।’’

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तेंदुलकर इस ऐतिहासिक मैच का गवाह बनने के लिए कोलकाता पहुंची हस्तियों में से है। उन्होंने कहा, ‘‘ये अच्छी बात है। हमने दिखाया है कि हम आगे बढ़कर नई चीजें आजमाना चाहते हैं। हम कोशिश करेंगे और फिर देखेंगे कि ये कामयाब हुई या नहीं। सफलता का मानदंड स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की संख्या ही नहीं होती। ये बस एक पहलू है।’’

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गुलाबी गेंद से घास वाली पिच पर क्या स्पिनर प्रभावी होंगे, ये पूछने पर उन्होंने पिछले साल के पर्थ टेस्ट का जिक्र किया जहां नाथन लियोन ने आठ विकेट लेकर भारत को 146 रन से जीत दिलाई थी। उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर स्पिनर कठोर और घास वाली पिच पर कुछ ज्यादा नहीं कर पाते लेकिन पिछले साल जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया गई थी तो पर्थ की पिच पर तेज गेंदबाजों को मदद मिली थी।’’

भारत के पेस अटैक की सफलता का श्रेय फिटनेस को देते हुए तेंदुलकर ने कहा, ‘‘हमारे पास तीन गेंदबाज हैं जो 140 की गति से गेंदबाजी कर रहे हैं। उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा और इसका श्रेय फिटनेस को जाता है।’’