आम तौर पर माना जाता है कि रोना लड़कियों का काम है. पुरुष बेहद मजबूत होते हैं और वो रोने-धोने जैसी चीजों से दूर रहते हैं. कुछ लोग रोना मर्दों की शान के खिलाफ भी मानते हैं. इन तमाम भ्रांतियों को तोड़ते हुए मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने महिलाओं और पुरुषों के नाम एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्‍होंने पुरुषो को मजबूत बनाने के लिए भावनाओं का खुलकर इजहार करने की बात कही.

पढ़ें:- पिंक बॉल पर नजरें मजबूत करने के लिए भारतीय बल्‍लेबाजों ने नेट्स में लगाई ये चीज

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि पुरुषों को अगर रोना आए तो जरूर रोना चाहिए. पुरुषों के लिए ऐसा करना सही है. ‘इंटरनेशनल मेंस वीक’ के अवसर पर सचिन तेंदुलकर ने यह बात कही.  सचिन ने कहा, “अगर मुश्किल पलों में आप भावुक हो जाते हैं तो यह अच्‍छा है. आपके जीवन में ऐसे पल आएंगे, जब आपको डर, संदेह और परेशानियों का अनुभव होगा. ऐसा समय भी आएगा जब आप विफल हो जाएंगे और आपको रोने का मन करेगा.”

“यकीनन ऐसे समय में आप अपने आंसुओं को रोक लेंगे और खुद को मजबूत दिखाने का प्रयास करेंगे. आम तौर पर ऐसा ही होता है. पुरुषों को इसी तरह बड़ा किया जाता है कि पुरुष कभी रोते नहीं. रोने से पुरुष कमजोर होते हैं. मैं भी यही सोचते हुए बड़ा हुआ था. लेकिन, मैं गलत था.”

पढ़े:- Day Night Test से पहले सौरव गांगुली- रवि शास्‍त्री ने किया ईडन गार्डन की पिच का मुआयना

सचिन तेंदुलकर ने आगे कहा, “मैं अपने जीवन में कभी भी 16 नवंबर 2013 की तारीख को भूल नहीं सकता. मेरे लिए उस दिन आखिरी बार पवेलियन लौटना बहुत मुश्किल था और दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था. मेरा गला रुंध गया था लेकिन फिर अचानक मेरे आंसू दुनिया के सामने बह निकले और हैरानी की बात है कि उसके बाद मैंने शांति महसूस की. अपने आंसुओं को दिखाना कोई शर्म की बात नहीं है. अपने व्यक्तित्व के एक हिस्से को क्यों छिपाना जो वास्तव में आपको मजबूत बनाता है.”