भारतीय क्रिकेट टीम के 1950 के दशक के खिलाड़ी माधव आप्टे का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया है. उन्होंने मुंबई के कैंडी ब्रिज हॉस्पिटल में अपनी अंतिम सांस ली. इस खबर से पूरी क्रिकेट की दुनिया स्तब्ध हो चुकी है. क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने आप्टे को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. भारत के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने स्वर्गीय माधव आप्टे के लिए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ट्वीट किया, “माधव आप्टे सर की दिलकश यादें. जब मैं 14 साल का था तब मुझे शिवाजी पार्क में उनके खिलाफ खेलने को मिला.फिर भी उस समय को याद करें जब उन्होंने और डूंगरपुर सर ने मुझे एक 15 वर्षीय के रूप में सीसीआई के लिए खेलने का मौका दिया. उन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया और  शुभचिंतक थे. उनकी आत्मा को शांति दें’.

आप्टे ने शुरुआत में एक लेग स्पिनर के रूप में अपने आप को टीम में पेश किया, लेकिन बाद में, वो एक फ्रंटलाइन बल्लेबाज बन गए. क्रिकेट के अलावा, उन्होंने टेनिस, स्क्वैश और बैडमिंटन में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. इस पूर्व खिलाड़ी ने अपने क्रिकेट करियर में कुल 7 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 542 रन बनाए हैं. इन सात मैचों की पारियों में उन्होंने एक शतक और तीन अर्धशतक भी लगाए हैं. अगर फर्स्ट क्लास क्रिकेट की बात करें तो माधव ने कुल 67 मैच खेले जिसमें उन्होंने 3336 रन बनाए हैं. इसमें उन्होंने 16 अर्धशतक और 6 शतक लगाए थे. माधव आप्टे ने लेग स्पिन गुगली गेंदबाज के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी. इस मोर्चे पर उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. जाइल्स एंड शील्ड टूर्नामेंट के एक मैच में उन्होंने 10 रन देकर 10 विकेट लिए.

अपने टेस्ट करियर में रुकावट के लिए लाला अमरनाथ को जिम्मेदार मानते थे माधव आप्टे

इसके अलावा आप्टे ने कई वर्षों तक क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया और लिजेड्स क्लब में अध्यक्ष के पद पर भी अपनी सेवाए दीं थीं. उनकी मौत की खबर के बाद क्रिकेट जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है. परिवार की तरफ से उनके अंतिम संस्कार के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.

हालांकि मुंबई क्रिकेट को पहचानने वाले लोग आप्टे को खेल के प्रति उनके प्यार के लिए याद करते हैं. अनुभवी पत्रकार मकरंद वायंगणकर ने याद करते हुए कहा, ‘‘वह 50 साल तक कांगा लीग में खेले. वह आखिरी बार उस समय खेले जब 71 बरस के थे. वह बेदाग सफेद कपड़ों में किट बैग और छाते के साथ आम खिलाड़ी की तरह आते थे. 60 से अधिक की उम्र में उन्होंने अबे कुरुविला का सामना किया जो उनसे आधी उम्र का था.’’ मकरंद देश से बाहर रहने के दौरान भी आप्टे के खेल के प्रति प्यार को याद करते हैं. उन्होंने बताया कि आप्टे कुआलालंपुर या सिंगापुर से भी फोन करके अपने क्लब जाली क्रिकेटर्स के कांगा लीग के कार्यक्रम के बारे में पूछते थे.

पूर्व भारतीय क्रिकेटर माधव आप्टे का मुंबई के अस्पताल में निधन