सचिन तेंदुलकर को 2007 के विश्व कप की निराशाजनक हार ने इस कदर तोड़ कर रख दिया था कि वह संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे। आपने सचिन के इंटरव्यू में उनके करियर के सबसे बुरे दौर के अनुभवों के बारे में पढ़ा। सचिन ने मिड डे को दिए गए इंटरव्यू के दूसरे हिस्से में बताया कि कैसे वह उस निराशाजनक हार से उबरकर एक विजेता बनकर उभरे और कैसे उस हार से उबरकर टीम इंडिया वर्ल्ड चैंपियन बनी। आइए पढ़ें एक निराशाजनक हार से उबरकर सचिन के विजेता बनने तक का सफर। Also Read - COVID-19: सचिन तेंदुलकर को अस्पताल से मिली छुट्टी; आइसोलेशन में रहकर करेंगे आराम

रवि शास्त्री का साथ आया काम
सचिन तेंदुलकर ने कहा कि 2007 के विश्व कप की हार के बाद भारत बांग्लादेश के दौरे पर गया। वहां रवि शास्त्री के साथ सचिन को काफी वक्त बिताने और बातें करने का मौका मिला। पहला टेस्ट चिटगांव में खेला गया, जहां भारत शुरू में थोड़ा संघर्ष कर रहा था लेकिन फिर सचिन ने शतक जमाया, वह टेस्ट मैच हालांकि ड्रॉ रहा लेकिन उस मैच से ही चीजों के बदलने की शुरुआत हो गई। टीम इंडिया ने दूसरे टेस्ट में प्रभावशाली जीत दर्ज की। Also Read - ICC World Cup Super League points table: द. अफ्रीका को हराकर दूसरे स्‍थान पर पहुंचा पाकिस्‍तान, भारत की हालत पतली

आयरलैंड की चुनौती
इसके बाद टीम इंडिया आयरलैंड के दौरे पर गई, जहां की परिस्थितियां दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में थी। लेकिन टीम इंडिया ने वनडे सीरीज में दक्षिण को हराया और सचिन को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। Also Read - मैं रिषभ पंत से प्रभावित हूं क्योंकि मुझे लगता है कि वो मैचविनर है: BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली

इंग्लैंड का शानदार दौरा
इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर सचिन ने कुछ बेहतरीन पारियां खेली। उन्होंने कहा, हालांकि मैंने शतक नहीं बनाया लेकिन मैंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया जिसका असर नतीजे पर दिखा। हमने इंग्लैंड को हराया और ड्रेसिंग रूम में सौहार्दपूर्ण माहौल लौट आया। यह भी पढ़ें: 2007 वर्ल्ड कप की हार से टूट गया था, दो दिन कमरे से नहीं निकला, सोचा संन्यास ले लूं: सचिन तेंदुलकर

इस दौरे में चंदू बोर्डे (मैनेजर और कोच), बोलिंग कोच के रूप में वेकेंटेश प्रसाद और फील्डिंग कोच के रूप में रॉबिन सिंह थे। सचिन ने कहा, ‘मैं देख सकता था कि खिलाड़ी खुश थे, वे मुस्कुरा रहे थे और वह मुस्कुराहट दिखावा नहीं बल्कि असली थी। वे ज्यादा मेहनत करके खुश खे और हमने बिना किसी एजेंडे और मुद्दे के बहुत समय बिताया। इस बेहतरीन वातावरण ने बहुत अंतर पैदा किया और इसका असर हम जिस तरह से खेले उसमें भी दिखा।’

ऑस्ट्रेलिया में मिली जीत
इसके बाद टीम इंडिया ने 2007-08 में ऑस्ट्रेलिया का एक यादगार दौरा किया, जहां टीम ने सीवी ट्राइंगुलर वनडे सीरीज जीती

जीत से दिया आलोचकों को जवाब
सचिन ने कहा, ‘मेरे ख्याल में वह जीत मेरे बारे में की जा रही सभी बकवास बातों को माकूल जवाब थी, जिसमें मुझे खुद को आईने में देखने के लिए कहा जा रहा था। ऐसा इयान चैपल (2007 के विश्व कप के बाद) द्वारा बिना ये जाने की वास्तव में क्या हो रहा है लिखा गया था। ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में जाकर उनके घर में हराना शानदारा था। हर कोई जानता है कि वह ऑस्ट्रेलियाई टीम कितनी ताकतवर थी। वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए प्रति असम्मान नहीं है लेकिन उस टीम (2007-08) और आज की टीम की कोई तुलना नहीं है।’ यह भी पढ़ें: सचिन तेंदुलकर ने बताई क्रिकेट को अलविदा कहने की वजह 

2011 के विश्व कप में मिली जीत
सचिन ने कहा, ‘2011 की जीत कुछ कारणों से सबसे ऊपर है। 2007 में ग्रेग छह-सात खिलाड़ियों को बदलना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगा कि वह अपना शत-प्रतिशत नहीं दे रहे हैं और बूढ़े हो रहे हैं और 2011 की टीम बनाने के लिए उन्हें हटाना जरूरी है। ये संदेश बीसीसीआई को दिया गया था। लेकिन उन्हीं छह-सात खिलाड़ियों ने 2011 के विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। इस मामले में मैं गैरी कस्टर्न और पैडी उपटन की तारीफ करता हूं, गैरी शानदार थे और इन दोनों ने साथ में मिलकर शानदार काम किया।’